अब तक 29 चुनाव लड़ चुके अमित शाह को नहीं मिली कभी हार, कार्यकर्ताओं से फोन पर कहते हैं ये बात
अमित शाह अब तक 29 चुनाव लड़ चुके हैं, उन्हें कभी भी हार का सामना नहीं करना पड़ा, हालांकि चुनाव लड़ने से ज्यादा वो चुनाव लड़वाने का काम करते हैं।
अमित शाह अब तक 29 चुनाव लड़ चुके हैं, उन्हें कभी भी हार का सामना नहीं करना पड़ा, हालांकि चुनाव लड़ने से ज्यादा वो चुनाव लड़वाने का काम करते हैं।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मोदी की जीत के प्रमुख रणनीतिकार है, साल 2014 लोकसभा चुनाव में उन्हें यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया था, तब उन्होने 80 में से 73 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था, इस बार वो पार्टी के अध्यक्ष थे, तो बीजेपी ने देशभर में तीन सौ का आंकड़ा पार कर दिया। 1988 में सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले अमित शाह ने सिर्फ तीस साल में ही देश की राजनीति बदल दी है, बड़े नेताओं के टिकट काटने से लेकर दूसरे दलों के नेताओं को तोड़ने तक का फैसला शाह कठोरता से लेते हैं।पार्टी को बनाया नंबर वन
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अमित शाह ने पार्टी के सदस्यों की संख्या को 10 करोड़ तक ले गये, पहले तो उनके इस लक्ष्य का पार्टी में उनके आलोचकों और विरोधियों ने माखौल उड़ाया,
लेकिन शाह ने अपने लक्ष्य को प्राप्त किया, अब तक राज्यसभा सांसद रहे शाह अब पहली बार गांधीनगर से लोकसभा चुनाव जीते हैं, राजनीति के चाणक्य को मोदी के खासमखास के साथ ही उत्तराधिकारी के रुप में भी देखा जाता है।
शाह की बड़ी भूमिका
पिछले लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने ज्यादा जनसभाएं और रैलियां नहीं की, वो यूपी में रणनीति पर काम करते रहे, पिछली बार बीजेपी के लिये वॉर रुम प्रशांत किशोर ने संभाला था,
लेकिन कंट्रोल रुम की जिम्मेदारी पूरी तरह से अमित शाह के पास थी, मोदी घूम-घूमकर रैलियां कर रहे थे, शाह कई-कई घंटे कंट्रोल रुम में बैठकर रणनीति पर काम करते रहे, नतीजा बीजेपी ने इतिहास रच दिया, पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई।
आज तक नहीं हारे चुनाव
अमित शाह अब तक 29 चुनाव लड़ चुके हैं, उन्हें कभी भी हार का सामना नहीं करना पड़ा, हालांकि चुनाव लड़ने से ज्यादा वो चुनाव लड़वाने का काम करते हैं,
कुछ साल पहले तक अमित शाह आडवाणी जी के लिये गांधीनगर में चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते थे, फिर मोदी के करीब आये, मोदी ने उन्हें गुजरात में गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी। फिर दिल्ली आने के बाद उन्हें भी गुजरात से दिल्ली ले आये।
दोस्त बोल रहा हूं
बीजेपी के कार्यकर्ता बताते हैं कि अध्यक्ष अमित शाह जब फोन करते हैं, तो खुद को दोस्त कहकर पहचान बताते हैं, इसके साथ ही अगर किसी वरिष्ठ नेता का टिकट काटते हैं,
तो उन्हें नाराज करने के बजाय फोन कर कहते हैं, कि आपके लिये भी कुछ सोच रखा है, पार्टी आपको किनारे नहीं कर रही, बल्कि आने वाली पीढी को आगे बढा रही है, आप भी मार्गदर्शन कर पार्टी को आगे बढाइये।



