बिहार में एनडीए को ऐतिहासिक जीत दिलाने में इस शख्स ने निभाई बड़ी भूमिका, शाह के हैं बेहद खास
बिहार के बीजेपी प्रभारी भूपेन्द्र यादव पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं।
बिहार के बीजेपी प्रभारी भूपेन्द्र यादव पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं।
देश के ज्यादातर राष्ट्रीय चैनल्स और सर्वे एजेंसियां बिहार में एनडीए की बंपर जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं, हालांकि सबके आंकड़ों में अंतर है, लेकिन दावा सभी ये कर रहे हैं कि 40 सीटों में से कम से कम दो तिहाई सीटें एनडीए के खाते में आएगी। इतना ही नहीं बीजेपी के लिये तो कहा जा रहा है कि वो अपने हिस्से की सभी 17 सीटें जीतने जा रही है, यानी बिहार में बीजेपी शत प्रतिशत सफलता के दावे कर रही है, जाहिर सी बात है कि ये उपलब्धि असामान्य है, कहा जा रहा है कि इस उपलब्धि के पीछे जिस शख्स की रणनीति काम कर रही है, वो प्रदेश के प्रभारी भूपेन्द्र यादव हैं।मोदी-शाह के करीबी
बिहार के बीजेपी प्रभारी भूपेन्द्र यादव पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं, इसे इस तरह भी समझा जा सकता है,
कि जब गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिये मुश्किल लग रहा था, तो मोदी-शाह ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी, आखिरकार वहां भी उन्होने पार्टी को जीत दिलाई, हालांकि जीत का अंतर पहले से कम था, लेकिन इस बार की स्थिति को देखते हुए जीत महत्वपूर्ण था।
परदे के पीछे रहकर प्लानिंग
भूपेन्द्र यादव बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, वो पर्दे के पीछे रहकर प्लानिंग करते हैं, ये उनकी प्लानिंग का ही कमाल है जो उन्होने विरोधियों के तमाम तिकड़मों को मात देते हुए मोदी और शाह के गृह प्रदेश गुजरात में 6ठीं बार विधानसभा चुनाव में जीत दिलाया,
मूल रुप से राजस्थान के अजमेर के रहने वाले भूपेन्द्र का वैसे तो बिहार से सीधा कोई कनेक्शन नहीं है, लेकिन 2015 बिहार विधानसभा चुनाव के समय उन्हें प्रभारी बनाया गया था, लेकिन तब लालू-नीतीश की जोड़ी ने बीजेपी को हरा दिया था, लेकिन पार्टी के वोटिंग परसेंटेज में कमी नहीं आई थी।
बिगड़ी बात बनाने में माहिर
रणनीति को जमीन पर उतारने और अंजाम तक पहुंचाने में भूपेन्द्र को माहिर माना जाता है, वो साल 2012 से राज्यसभा सांसद हैं, वो बिगड़ी बात को कैसे बना लेते हैं,
इसका अच्छा उदाहरण राम विलास पासवान है, साल 2018 में पासवान पाला बदलने के मूड में थे, लेकिन तब भूपेन्द्र यादव ने ही उन्हें दोबारा मोदी-शाह के करीब पहुंचा दिया। अमित शाह से बात करने के बाद वो सीधे पासवान के घर पहुंच गये, उन्होने दोनों पिता-पुत्र का हाथ पकड़ा और अमित शाह के पास मिलाने ले गये, जिसके बाद एक झटके में ही सारा खींचतान खत्म हो गया।
जदयू से बात
बिहार में जदयू से सीट शेयरिंग पर मामला सेट नहीं हो रहा था, तो भूपेन्द्र यादव ने ही सीएम नीतीश से बात की, और बीच का रास्ता निकाला,
जिसकी वजह से बिहार में एकजुट होकर एनडीए लड़ी, भूपेन्द्र रैली में भाषणबाजी के बजाय वॉर रुम में रहकर पूरी चुनाव प्रक्रिया को देखना पसंद करते हैं, वो कई भाषाओं के अच्छे जानकार हैं, और पेश से वकील हैं, उन्होने सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस भी की है, भूपेन्द्र की पत्नी का नाम बबीता यादव और वो दो बच्चों के पिता हैं।



