मोदी के खिलाफ लॉबिंग में लगे थे, 'बिहारी डकैत' ने चंद्रबाबू से छिन ली मुख्यमंत्री की कुर्सी

प्रशांत किशोर की रणनीति ने उस चंद्रबाबू नायडू को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जो आम चुनाव के परिणाम आने से कुछ दिन पहले तीसरा मोर्चा बनाने की अगुवाई कर रहे थे।

प्रशांत किशोर की रणनीति ने उस चंद्रबाबू नायडू को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जो आम चुनाव के परिणाम आने से कुछ दिन पहले तीसरा मोर्चा बनाने की अगुवाई कर रहे थे।

दिग्गज चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर से अपनी रणनीति का लोहा मनवाया, उन्होने आंध्र प्रदेश  में जगन मोहन रेड्डी की शानदार वापसी करवाई, आंध्रा में वाईएसआर की आंधी में टीडीपी कहीं गुम हो गई। आपको बता दें कि 175 विधानसभा सीट वाले आंध्र प्रदेश में 150 सीटों पर जगन मोहन की पार्टी जीती है, जबकि सत्ताधारी चंद्रबाबू की पार्टी सिर्फ 24 सीटों पर सिमट गई।

पीके ने कर दिया सत्ता से बाहर
प्रशांत किशोर की रणनीति ने उस चंद्रबाबू नायडू को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जो आम चुनाव के परिणाम आने से कुछ दिन पहले तीसरा मोर्चा बनाने की अगुवाई कर रहे थे,
वो दिल्ली की कुर्सी पर नजर गड़ाये बैठे थे, विपक्ष के तमाम नेताओं से जाकर मुलाकात कर रहे थे, पीके ने उनकी मुख्यमंत्री की भी कुर्सी छिन ली।

पीके ने मनवाया लोहा  
गुरुवार को जगनमोहन रेड्डी ने हैदराबाद स्थित अपने निवास पर प्रशांत किशोर के साथ ही बैठकर लगातार आ रहे चुनाव नतीजों को देखा,
उनकी पार्टी प्रदेश में 25 लोकसभा सीटों के साथ विधानसभा चुनाव भी लड़ रही थी, वाईएसआर कांग्रेस ने विधानसभा में 150 सीटों पर जीत हासिल की है, तो लोकसभा में भी बीजेपी और कांग्रेस के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर  उभरी है।

बिहारी डकैत कहा था  
आपको बता दें कि इसी साल मार्च में चंद्रबाबू नायडू ने प्रशांत किशोर पर हमला बोलते हुए उन्हें बिहारी डकैत कहा था,
उन्होने आरोप लगाया था कि पीके ने बिहारी तर्ज वाली राजनीति करते हुए दक्षिण के राज्यों में भी वहीं फॉर्मूला अपनाया है, उन्होने लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से कटवा दिये हैं, चंद्रबाबू  द्वारा बिहारी डकैत कहे जाने पर उनकी आलोचना भी हुई थी, हालांकि तब पीके ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था कि वो घबराये हुए नेता हैं, क्योंकि उनकी कुर्सी जाने वाली है।