एग्जिट पोल से कांग्रेस में खलबली, अमेठी को लेकर किया जा रहा ये दावा

अगर इस एग्जिट पोल पर यकीन करें, तो इसके मुताबिक कांग्रेस यूपी में सिर्फ 1 सीट पर सिमट जाएगी, ये सीट सोनिया गांधी की रायबरेली हो सकती है, या फिर राहुल गांधी की अमेठी।

अगर इस एग्जिट पोल पर यकीन करें, तो इसके मुताबिक कांग्रेस यूपी में सिर्फ 1 सीट पर सिमट जाएगी, ये सीट सोनिया गांधी की रायबरेली हो सकती है, या फिर राहुल गांधी की अमेठी।

तमाम न्यूज चैनल एग्जिट पोल के जरिये अगली सरकार का दावा कर रहे हैं, इसके मुताबिक देश में अगली सरकार मोदी की ही बनने वाली है, न्यूज-18 के एग्जिट पोल के मुताबिक एनडीए को 276 से ज्यादा सीटें मिल सकती है, अगर यूपी की बात करें, तो बीजेपी गठबंधन को 62 से 67 सीटें मिलने का अनुमान है, हालांकि कांग्रेस के लिये बुरी खबर है, दरअसल यूपी में कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिल रही है, यानी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी या उनकी मां सोनिया गांधी में से कोई एक या दोनों चुनाव हार रहे हैं।

रायबरेली-अमेठी 
अगर इस एग्जिट पोल पर यकीन करें, तो इसके मुताबिक कांग्रेस यूपी में सिर्फ 1 सीट पर सिमट जाएगी, ये सीट सोनिया गांधी की रायबरेली हो सकती है,
या फिर राहुल गांधी की अमेठी, हालांकि थोड़ा पीछे जाएं, तो ये समझने में मुश्किल नहीं होगी, कि राहुल अमेठी के साथ-साथ केरल के वायनाड से भी चुनाव क्यों लड़ रहे हैं। आपको बता दें कि रायबरेली-अमेठी सालों से कांग्रेस का किला रहा है, लेकिन इस बार लग रहा है कि इस किले को भी भेद किया जाएगा।

स्मृति ईरानी दे रही चुनौती
राहुल गांधी अमेठी के साथ-साथ वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं, अमेठी में राहुल को चुनौती देने वाली स्मृति ईरानी का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष को पहले से खबर थी,
कि वो चुनाव हार रहे हैं, इसलिये उन्होने वायनाड सीट चुनी, हालांकि सपा -बसपा गठबंधन ने इन दोनों सीटों पर उम्मीदवार नहीं दिये थे और कांग्रेस को समर्थन की बात कही थी।

2014 में जीत का अंतर कम
आपको बता दें कि राहुल अमेठी से बड़े अंतर से जीत हासिल करते थे, लेकिन 2014 में एकाएक बीजेपी ने चुनाव से 15 दिन पहले स्मृति ईरानी को यहां से उम्मीदवार घोषित किया,


मोदी लहर के बीच स्मृति ने 15 दिनों में खूब मेहनत की, हालांकि चुनाव तो वो हार गई, लेकिन राहुल के जीत का अंतर उन्होने कम कर दिया, पिछली बार राहुल करीब 1 लाख वोट से जीते थे,  हार के बाद भी स्मृति पिछले पांच साल  से अमेठी लगातार जाती रही, जिसके बाद कहा जा रहा  था कि इस बार कांग्रेस अध्यक्ष के लिये राह आसान नहीं रहने वाला है।