कहानी शिवपाल के शंभू की, भतीजों के तिलस्म को तोड़ने में चचा ने नहीं छोड़ी कोई कसर
2019 लोकसभा चुनाव में मोदी का रथ रोकने के लिये अखिलेश यादव ने बसपा और रालोद के साथ गठबंधन कर तिलस्म बनाया था, लेकिन इस तिलस्म को उनके चाचा शिवपाल यादव ने ही तोड़ दिया।
2019 लोकसभा चुनाव में मोदी का रथ रोकने के लिये अखिलेश यादव ने बसपा और रालोद के साथ गठबंधन कर तिलस्म बनाया था, लेकिन इस तिलस्म को उनके चाचा शिवपाल यादव ने ही तोड़ दिया।
लोकसभा चुनाव में यूपी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष के तिलिस्म को तोड़ने में जाने-अनजाने उनके चाचा शिवपाल यादव ने ही बड़ी भूमिका निभाई, प्रदेश की कई सीटों पर सपा को करारी हार दिलाने में इनकी भूमिका देखी जा रही है, इटावा सीट लगातार दूसरी बार बीजेपी जीतने में सफल रही, तो कन्नौज से यादव परिवार की बहू डिंपल यादव भी हार गई।गढ में हार
आपको बता दें कि औरैया जिले में तीन विधानसभा हैं, जिसमें औरैया और दिबियापुर इटावा लोकसभा के अंतर्गत आते हैं, तो बिधूना कन्नौज लोकसभा में लगता है,
दोनों ही सपा के गढ माने जाते थे, 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, लेकिन तब भी कन्नौज सीट डिंपल ने बचा लिया था, लेकिन इस बार डिंपल यादव की भी सीट नहीं बच सकी।
सपा का तिलस्म टूटा
2019 लोकसभा चुनाव में मोदी का रथ रोकने के लिये अखिलेश यादव ने बसपा और रालोद के साथ गठबंधन कर तिलस्म बनाया था, लेकिन इस तिलस्म को उनके चाचा शिवपाल यादव ने ही तोड़ दिया,
चाचा ने प्रदेश की कई सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, जहां भी उन्होने उम्मीदवार उतारे, उसने सपा के ही वोट काटे, सपा नेताओं को हराने के लिये प्रसपा के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का भरपूर साथ दिया।
शंभू ने किया काम तमाम
इटावा सीट पर शिवपाल यादव की पार्टी से शंभू दयाल दोहरे चुनावी मैदान में थे, चुनाव के शुरुआत में तो लगा कि प्रसपा के कार्यकर्ता जीत के लिये दिन-रात एक किये हुए हैं,
लेकिन सूत्रों का दावा है कि मतदान से 24 घंटे पहले प्रसपा के कार्यकर्ता को लगा कि नहीं जीत पाएंगे, तो उन्होने बीजेपी के पक्ष में हवा बनानी शुरु कर दी। फिरोजाबाद में शिवपाल यादव को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होने भतीजे अक्षय का खेल खराब कर दिया, जिसकी वजह बीजेपी जीतने में सफल रही।
बीजेपी को मजबूत किया
कहा जा रहा है कि यहां तक शिवपाल की पार्टी के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर बीजेपी के पक्ष में हवा बना रहे थे, नतीजा ये रहा कि प्रसपा का वोटबैंक बीजेपी में जा मिला।
मालूम हो कि प्रसपा के जो भी नेता और कार्यकर्ता हैं, ज्यादातर सपा से ही निकल कर आये हैं, पार्टी के सूत्रों का दावा है कि प्रसपा के कुछ नेताओं ने यहां तक संकल्प ले लिया था कि सपा को किसी हाल में नहीं जीतने देंगे, उन्होने भी बीजेपी के पक्ष में मतदान करने के लिये अपील की।



