झुग्गी में बीता बचपन, मां-बाप ने भी नहीं दिया साथ, प्रेरणादायक है इस युवा आईएएस की कहानी
उम्मुल को जेएनयू से भी दो हजार रुपये महीने की स्कॉलरशिप मिल गई, जून 2017 में आये यूपीएससी परीक्षा परिणाम में उन्होने 420वां स्थान हासिल किया।
उम्मुल को जेएनयू से भी दो हजार रुपये महीने की स्कॉलरशिप मिल गई, जून 2017 में आये यूपीएससी परीक्षा परिणाम में उन्होने 420वां स्थान हासिल किया।
ये प्रेरणादायक कहानी है आईएएस में 420वां स्थान हासिल करने वाली उम्मुल खेर की, उम्मुल ऑस्टियो जेनेसिस नामक बीमारी से पीड़ित है, 28 साल की उम्र तक उनकी 8 बार सर्जरी हो चुकी थी, वैसे तो उम्मुल का जन्म राजस्थान के पाली मारवाड़ में हुआ, जब वो 5 साल की थीं, तभी उनके फेरी लगाकर कमाने वाले पिता उन्हें लेकर दिल्ली आ गये, जहां पांचवीं तक वो पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंस्टीट्यूट फॉर फिजिकली हैंडीकैप्ड में पढीं, उम्मुल जब सातवीं में पढती थी, तभी झुग्गी के आस-पास के बच्चों को पढाकर 100-200 रुपये महीना कमा लेती थी।झुग्गी में रहती थी
उम्मुल खेर शारीरिक दुर्बल बच्चों के स्कूल अमर ज्योंति में आठवीं तक पढी, तब वो हजरत निजामुद्दीन इलाके की झुग्गी झोपड़ी में रहती थी, फिर साल 2001 में ये झुग्गियां उजाड़ दी गई,
आठवीं तक पढने के बाद उनके माता-पिता को लगा, कि बेटी को जितना पढना चाहिये, वो उन्हें उतना पढा चुके हैं, जिसके बाद उन्हें स्कूल से निकालने की बात हुई, लेकिन उम्मुल आगे की पढाई पर अड़ी रही।
माता-पिता को छोड़ पढाई चुनी
उम्मुल के सामने माता-पिता और पढाई में से किसी एक को चुनने को कहा गया, तो उम्मुल ने भारी मन से पढाई को चुना, सिर्फ 14 साल की उम्र में वो अपने मम्मी-पापा से अलग रहने लगी,
पढाई के दौरान ही स्कूल की शिक्षिका को कोई डोनर मिल गया, जिसने उनका दाखिला अर्वाचीन स्कूल में नौंवी क्लास में करवाया।
ट्यूशन पढा कर खर्च निकाला
उम्मुल खेर ने बच्चों को ट्यूशन पढाकर अपना खर्च निकाला, कुछ बच्चों को पढाने से शुरु की गई ट्यूशन में बच्चों की संख्या लगातार बढती गई,
जिसके बाद वो अलग-अलग बैच में पढाने लगी, उम्मुल शाम तीन बजे से रात ग्यारह बजे तक लगातार बच्चों को पढाती थी, हर बच्चे से 50 से 100 रुपये फीस लेती थीं। दसवीं में 91 फीसदी नंबर के साथ स्कूल में टॉप किया, फिर त्रिलोकपुरी में अलग कमरा ले लिया और वहां रहकर बच्चों को पढाने के साथ खुद भी पढने लगी, 12वीं में 89 फीसदी नंबर लाये, इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में दाखिला लिया, बच्चों को ट्यूशन पढाना जारी रखा, ग्रेजुएशन के बाद जेएनयू शोध करने पहुंची और साथ में आईएएस की तैयारी शुरु की।
420 वां स्थान
उम्मुल को जेएनयू से भी दो हजार रुपये महीने की स्कॉलरशिप मिल गई, जून 2017 में आये यूपीएससी परीक्षा परिणाम में उन्होने 420वां स्थान हासिल किया,
इसके साथ ही उन्होने सारे हालातों को हरा दिया। वो डिसेबिलिटी कोट से आईएएस बनीं, उम्मुल की कहानी बेहद प्रेरणादायक है।



