मेनका गांधी जिन्होने इंदिरा के आगे भी घुटने नहीं टेके, पहली नजर में संजय को हो गया था प्यार
मेनका को भी संजय भा गये थे, हालांकि दोनों के उम्र में दस साल का अंतर था, शुरुआत में तो मेनका के घर वाले शादी को राजी नहीं थे।
मेनका को भी संजय भा गये थे, हालांकि दोनों के उम्र में दस साल का अंतर था, शुरुआत में तो मेनका के घर वाले शादी को राजी नहीं थे।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सुल्तानपुर से नवनिर्वाचित सांसद मेनका गांधी इन दिनों सुर्खियों में हैं, दरअसल उन्हें मोदी सरकार 2.0 में जगह नहीं दी गई, जीत के बाद रविवार को मेनका अपने संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर पहुंची, जहां वो लोगों और मीडियाकर्मियों से मुखातिब हुई, उनसे मंत्री पद को लेकर भी सवाल पूछा गया, तो उन्होने कहा कि इसका जवाब सुल्तानपुर की जनता से लीजिए, हालांकि आज हम मेनका का राजनीतिक नहीं बल्कि निजी जिंदगी की बात करते हैं।गांधी-नेहरु परिवार की छोटी बहू
गांधी परिवार की छोटी बहू ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी अलग पहचान बनाई, हालांकि उनकी निजी जिंदगी के कुछ पन्ने बेहद दिलचस्प हैं,
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय से उनकी मुलाकात, फिर शादी होना मेनका के जीवन के काफी रोचक पहलू हैं।
संजय से दस साल छोटी
कम ही लोगों को पता है कि इंदिरा और फिरोज गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी को खुद से दस साल छोटी मॉडल मेनका आनंद से पहली ही नजर में प्यार हो गया था,
तब मेनका 17 साल की थी और बाम्बे डाईंग की चर्चित मॉडल थी, हालांकि शूटिंग प्वाइंट पर संजय गांधी ने उन्हें देखा जरुर, लेकिन दोनों की पहली मुलाकात मेनका के कजिन वाणी कपूर के घर पर एक पार्टी में हुई।
1974 में शादी
मेनका को भी संजय भा गये थे, हालांकि दोनों के उम्र में दस साल का अंतर था, शुरुआत में तो मेनका के घर वाले शादी को राजी नहीं थे, लेकिन बाद में दोनों परिवार के लोग मान गये,
जिसके बाद साल 1974 में अग्नि को साझी मान दोनों ने सात फेरे लिये। मेनका बतौर पत्नी अपने पति के साथ हमेशा साये की तरह रहा करती थी, हालांकि दोनों का प्यार ज्यादा लंबा नहीं चला, 23 जून 1980 को एक दर्दनाक विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई।
हालात के आगे घुटने नहीं टेके
संजय गांधी के निधन के समय बेटे वरुण सिर्फ तीन महीने के थे, संजय के गुजर जाने के बाद मेनका ने इंदिरा गांधी का घर छोड़ दिया, उन्होने परिवार से अलग होने का फैसला लिया,
हालांकि उन्होने हालात के आगे घुटने नहीं टेके, बल्कि संघर्ष कर राजनीति में अपनी खास जगह बनाई, उन्होने बीजेपी ज्वाइन की, और एनडीए की सरकार में मंत्री भी बनीं, उनके बेटे वरुण गांधी भी बीजेपी के महासचिव हैं और पीलीभीत से इस बार सांसद चुने गये हैं।



