यहां आज भी मौजूद हैं लैला-मजनूं के निशान, प्यार की मन्नत मांगने आते हैं लोग

इनके प्यार की निशानी इतनी मशहूर है, कि आज भी कई प्रेमी जोड़ा इस मकबरे में आकर अपने प्यार और सफल वैवाहिक जीवन के लिये दुआ मांगते हैं और मत्था टेकते हैं।

इनके प्यार की निशानी इतनी मशहूर है, कि आज भी कई प्रेमी जोड़ा इस मकबरे में आकर अपने प्यार और सफल वैवाहिक जीवन के लिये दुआ मांगते हैं और मत्था टेकते हैं।

सैर-सपाटे के शौकीन लोगों को सिर्फ घूमने-फिरने का बहाना चाहिये होता है, पहाड़, समुद्र, बर्फबारी और ऐतिहासिक स्थाने तो हर घूमने वाले की पहली पसंद होती है, इसके अलावा प्राकृतिक नजारों और खूबसूरत कलाकृतियों का भी लुत्फ उठाया जा सकता है। अभी तक आपने  ज्यादातर लोगों को प्यार की निशानी के तौर पर सिर्फ ताजमहल ही घूमते देखा होगा, लेकिन आज हम आपको एक नई जगह के बारे में बताते हैं, लैला मजनू के प्यार के किस्से तो आपने जरुर सुनी होगी, तो आइये उनके मकबरे के बारे में आपको बताते हैं।

राजस्थान में मकबरा
लैला मजनूं का मकबरा राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ से 11 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव बिंजौर में है, ये गांव भारत-पाक सीमा के पास बसा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक लैला मजनू (कैस मजनूं का असली नाम) साथ जिंदगी बिताने के लिये अपने घर से भागकर राजस्थान पहुंचे थे। लेकिन रेगिस्तान में पानी नहीं मिलने की वजह से उनकी मौत हो  गई, लैला के परिवार वालों को जब इस बात की जानकारी  मिली, तो उन्होने बिंजौर में ही दोनों की याद में मकबरा बनवा दिया।

प्यार की निशानी 
इनके प्यार की निशानी इतनी मशहूर है, कि आज भी कई प्रेमी जोड़ा इस मकबरे में आकर अपने प्यार और सफल वैवाहिक जीवन के लिये दुआ मांगते हैं और मत्था टेकते हैं।
प्यार में कुर्बान इस जोड़ी के नाम पर हर  साल  जून महीने में मेला लगता है, साथ ही लंगर का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें आने वाले लोगों को फ्री में भोजन के रुप में प्रसाद दिया जाता है।

कई चीजें हैं दर्शनीय
इसके अलावा भी यहां की कई चीजें दर्शनीय है, पुरातत्व विभाग को बिजौंर के पास बरोर में हड़प्पा सभ्यता से जुड़े कुछ अवशेष मिले हैं,
जिससे पता चला है कि पहले के समय में कभी वहां फैक्ट्री हुआ करती थी, हालांकि अब बिंजौर लैला मजनूं के लिये जाना जा रहा है।