इस सीट पर है मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू की नजर, महाभारत थमने वाला नहीं है

अपर्णा यादव ने पूरी तरह से अखिलेश यादव और सपा का बचाव किया है, उन्होने बसपा को लोकसभा चुनाव में हार पचाने की नसीहत दी है।

अपर्णा यादव ने पूरी तरह से अखिलेश यादव और सपा का बचाव किया है, उन्होने बसपा को लोकसभा चुनाव में हार पचाने की नसीहत दी है।

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव सपा-बसपा गठबंधन टूटने के बाद खुले तौर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के समर्थन में नजर आ रही है, अपर्णा ने मायावती तो हार पचाने की नसीहत दे डाली, दरअसल सूत्रों का कहना है कि छोटी बहू की नजर उपचुनाव पर टिकी है, जिसके जरिये वो दोबारा अपने राजनैतिक करियर को शुरु करना चाहती हैं।

सपा का बचाव
अपर्णा यादव ने पूरी तरह से अखिलेश यादव और सपा का बचाव किया है, उन्होने बसपा को लोकसभा चुनाव में हार पचाने की नसीहत दी है,
इसके साथ ही उन्होने अपने जेठ अखिलेश यादव का एक तरह से समर्थन किया है, क्योंकि इन दिनों अखिलेश पर उनके विरोधी शब्दबाण चला रहे हैं, सपा हर ओर से घिरे नजर आ रहे हैं, ऐसे में अपर्णा उनके बचाव में आगे आ गई है।

पहले लड़ चुकी है चुनाव
आपको बता दें कि छोटी बहू लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से 2017 में चुनाव लड़ चुकी है, हालांकि तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था,
अखिलेश यादव और अपर्णा के बीच रिश्ते ज्यादा अच्छे नहीं माने जाते हैं, कहा जाता है कि अपर्णा लोकसभा चुनाव में संभल से टिकट चाहती थी, लेकिन अखिलेश ने साफ मना कर दिया, मुलायम सिंह यादव ने भी अपर्णा के टिकट के लिये अखिलेश को कहा था लेकिन अखिलेश ने कहा कि सारी सीटों पर घर के ही लोग होंगे, तो बाकी कार्यकर्ता क्या करेंगे।

शिवपाल की करीबी 
अपर्णा यादव को चाचा शिवपाल यादव की करीबी भी कहा जाता है, वो उन्हें अपनी राजनैतिक गुरु मानती है, जब लखनऊ में शिवपाल यादव ने अपनी अलग पार्टी का ऐलान किया था,
तो अपर्णा भी उनके मंच पर दिखी थी, हालांकि इस लोकसभा चुनाव में शिवपाल यादव की पार्टी से वो चुनाव नहीं लड़ी, लिहाजा अब जब सपा-बसपा गठबंधन लगभग टूट चुका है, शिवपाल के वापसी की बात हो रही है, ऐसे में अपर्णा ने भी अखिलेश के पक्ष में खुलकर बयान देकर अपनी राजनैतिक जमीन तलाशनी शुरु कर दी है।

लखनऊ कैंट सीट 
आपको बता दें कि योगी सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के सांसद बन जाने के बाद लखनऊ कैंट विधानसभा  सीट पर उपचुनाव होना है, पिछली बार भी अपर्णा इस सीट से मैदान में उतरी थी,
उन्हें करीब 61 हजार वोट भी मिले थे, हालांकि तब भी अखिलेश उन्हें टिकट देने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन मुलायम सिंह यादव के कहने के बाद उन्हें टिकट दिया गया। अखिलेश ने तब अपर्णा के लिये प्रचार भी नहीं किया था।