मिलिये सागर शाह से... जो पकौड़े तलने के लिये छो़ड़ रहे हैं NIT कॉलेज में एडमिशन

सागर ने कहा कि उसके पिता और ताऊ बुजुर्ग हो गये हैं, उन्होने रोजाना 12-13 गंटे काम करते देखकर बहुत बुरा लगता है।

सागर ने कहा कि उसके पिता और ताऊ बुजुर्ग हो गये हैं, उन्होने रोजाना 12-13 गंटे काम करते देखकर बहुत बुरा लगता है।

पीएम मोदी ने पकौड़े तलने को रोजगार बताया था, तो कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए पढे-लिखे नौजवानों के लिये उपहास कहा था, लेकिन उत्तराखंड के चमौली का एक नौजवान ऐसा भी है, जो इंजीनियरिंग छोड़ पकौडी की दुकान चला रहा है, चमोली के पीपलकोटी के सागर शाह नामक युवक को एमटेक करने से बेहतर पकौड़ा तलना लगा, जिसके बाद युवक ने एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित कॉलेज में एडमिशन छोड़ दिया और पकौड़े तलने लग गया, सुनकर शायद आपको भी अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सच है।

पहली कोशिश में गेट पास
चमोली पीपलकोटी के सागर शाह ने अपनी पहली ही कोशिश में बिना किसी कोचिंग के गेट की परीक्षा पास कर ली, करीब एक महीने पहले आये परिणाम में सागर शाह का रैंक 8 हजार के करीब था, सागर के मुताबिक रैंक के अनुसार उसे किसी प्रतिष्ठित एनआईटी कॉलेज में एमटेक में एडमिशन मिल जाता, लेकिन उसने एडमिशन ही नहीं लिया, फिलहाल वो पैसे कमाना चाहता है, इसलिये उसे आगे की पढाई भारी लग रही है।

पकौड़े की दुकान
सागर के परिवार की पीपलकोटी में पकौड़े की दुकान है, पहले भी वो समय-समय पर घरवालों की दुकान चलाने में मदद करता था, पढाई और काम के बीच उसने ना सिर्फ बीटेक किया,
बल्कि गेट भी क्वालिफाई कर गया, पकौड़े की दुकान पर उसके पिता, ताऊ और भाई काम करते हैं, जिसके बाद अब सागर ने फैसला लिया है, कि नियमित रुप से वो भी दुकान पर काम करेगा।

दुकान पर लगती है भीड़
सागर की ये दुकान बदरीनाथ धाम के रुट पर है, जहां अप्रैल से नवंबर तक मंदिर के खुलने के दौरान भारी भीड़ जुटती है, दुकान अच्छी चलती है,
लिहाजा व्यवस्था संभालने के लिये कई लोगों की आवश्यकता पड़ती है, आदमनी भी अच्छी होती है, सागर को लगता है कि एमटेक की पढाई करने से अच्छा है कि परिवार की दुकान संभालनी चाहिये।

सागर ने क्या कहा 
सागर ने कहा कि उसके पिता और ताऊ बुजुर्ग हो गये हैं, उन्होने रोजाना 12-13 गंटे काम करते देखकर बहुत बुरा लगता है, लिहाजा मैंने फैसला लिया है,
कि एमटेक की दो साल की पढाई करने के बजाय अपनी दुकान संभालेंगे, ताकि पिता को थोड़ी  राहत मिल सके, सागर  का ये फैसला ज्यादातर लोगों को अजीब लग रहा है, क्योंकि एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित कॉलेज में एडमिशन के लिये छात्र काफी मेहनत करते है, जबकि सागर को ये मौका मिल रहा है, तो वो उसे छोड़ रहा है।