यूपी के बाद पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा लोग बनना चाहते हैं संघी, RSS से दावे से सियासी भूकंप
आरएसएस में विभिन्न पदों पर बैठे अधिकारी और कार्यकर्ता बंगाल में बढते ग्राफ से काफी खुश हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल में संघ की दो यूनिट ही है, जबकि यूपी में 6 यूनिट काम कर रही है।
पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की परेशानियां बढ सकती हैं, ऐसा इसलिये कहा जा रहा है, क्योंकि बंगालवासी बीजेपी के करीबी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में खासा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, आरएसएस के पदाधिकारियों का दावा है कि संघ का सदस्य बनने के लिये जो ऑनलाइन आवेदन आ रहे हैं, वो यूपी के बाद पश्चिम बंगाल से सबसे ज्यादा आ रहे हैं।बंगाल में बढ रहा संघ
द प्रिंट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आरएसएस की आधिकारिक वेबसाइट पर ज्वाइन आरएसएस पहल से जुड़ने के मामले में पश्चिम बंगाल में साल 2017 में करीब 7400 आवेदकों ने फॉर्म भरा था,
तब बंगाल 6ठें स्थान पर था, साल 2018 में ये आंकड़ा बढकर 9000 हो गया, अब इस साल 15 जून तक ही ये आंकड़ा 7700 पार कर चुका है, हालांकि यूपी के लोग सबसे ज्यादा संघ से जुड़ना चाहते हैं, यहां के आवेदकों की संख्या 9392 हो चुका है।
आंकड़े प्रसन्न करने वाले
आरएसएस में विभिन्न पदों पर बैठे अधिकारी और कार्यकर्ता बंगाल में बढते ग्राफ से काफी खुश हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल में संघ की दो यूनिट ही है, जबकि यूपी में 6 यूनिट काम कर रही है,
एक पदाधिकारी ने बताया कि संघ से जुड़ने के लिये आने वाले ऑनलाइन आवेदनों में इस साल अच्छी लहर देखने को मिल रही है, उनके मुताबिक देश भर से आने वाले आवेदनों की संख्या 62 हजार पार हो चुकी है, जबकि 2017 और 2018 में क्रमशः 1 लाख और 1 लाख 10 हजार थी।
इन राज्यों में भी क्रेज
आरएसएस पदाधिकारियों के मुताबिक संघ से जुड़ने के लिये यूपी और बंगाल के बाद सबसे ज्यादा रुचि क्रमशः महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली के लोग दिखा रहे हैं,
राजनीतिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक संघ का ये दावा ममता बनर्जी का सिदर्द बढा सकता है, क्योंकि हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में शानदार प्रदर्शन किया है।
2021 में विधानसभा चुनाव
आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इस बार की लड़ाई टीएमसी बनाम बीजेपी की होगी, ऐसे में संघ के बढते ग्राफ से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ सकती है,
वैसे ममता बनर्जी ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को विधान सभा चुनाव में रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है, अब देखना है कि ऊंट किस करवट बैठती है।



