शीला दीक्षित के अचानक निधन से कांग्रेस के सामने खड़ी हुई नई संकट, आसान नहीं है राह
दिल्ली कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि नेताओं की वर्तमान श्रेणी में कोई भी नेता दिल्ली में शीला दीक्षित की तरह लोकप्रिय और अपीली नहीं है।
दिल्ली की पूर्व सीएम और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष शीला दीक्षित का शनिवार दोपहर अचानक निधन हो गया, उनके गुजर जाने से पार्टी को बड़ी क्षति हुई है, साथ ही एक नया संकट भी खड़ा हो गया है कि दरअसल 6 महीने बाद ही दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में पार्टी के सामने बड़ी चुनौती है कि ऐसे नेता को तलाशे जो पार्टी की जिम्मेदारी अच्छे से संभाल सके।दिल्ली कांग्रेस में गुटबाजी
नये नेता को दिल्ली में गुटबाजी से निपटना होगा, दरअसल शीला दीक्षित के रहते भी दिल्ली कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर था, हालांकि हाईकमान को शीला दीक्षित पर भरोसा था,
लेकिन उनके विरोध का पता तब चला, जब कई कांग्रेस नेता लोकसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के पक्ष में थे, लेकिन शीला दीक्षित लगातार विरोध करती रही।
कोई भी उनके जैसा नहीं
दिल्ली कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि नेताओं की वर्तमान श्रेणी में कोई भी नेता दिल्ली में शीला दीक्षित की तरह लोकप्रिय और अपीली नहीं है,
तीन कार्यकारी अध्यक्ष हारुन यूसूफ, देवेन्द्र यादव और राकेश लिलोठिया पर बड़ी जिम्मेदारी है, शीला जी के अचानक निधन से दिल्ली कांग्रेस बुरी तरह आहत है।
शीला दीक्षित की वापसी से उम्मीदें
साल 2013 विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में कांग्रेस को हर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, पार्टी तीसरे नंबर पर चली गई थी,
लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने एक बार फिर पार्टी की कमान शीला जी की हाथों में सौंपा, जिसके बाद लोकसभा चुनाव में पार्टी कुछ सीटों पर बीजेपी के साथ फाइट करती दिखी। जिसे माना गया, कि विधानसभा चुनाव में भी पार्टी अच्छा कर सकती है।
विधानसभा चुनाव की तैयारी
शीला दीक्षित अगले साल जनवरी-फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही थीं, अब पार्टी को चुनाव से पहले संगठन का नेतृत्व करने के लिये एक नये नेता को ढूंढना होगा,
अजय माकन स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे चुके हैं, अरविंदर सिंह लवली भी डीपीसीसी अध्यक्ष के रुप में काम कर चुके हैं, कहा जा रहा है कि इन दोनों में से ही किसी को कमान मिल सकती है।



