आतंकी हमले में 8 गोलियां खाई, महीनों ICU में गुजारे, फिर जान देने को तैयार, ज्वाइन किया ड्यूटी

खुर्शीद अहमद की तरह ही उनकी पत्नी भी बेखौफ हैं, उन्होने कहा कि मरने से क्या डरना, एक दिन तो सबको मरना है।

सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल खुर्शीद अहमद को 2017 में आतंकी हमले के दौरान 8 गोलियां लगी थी, गोली लगने की वजह से उनके कमर के निचे के हिस्से ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया था, उन्होने स्पाइनल इंजरी की लंही पीड़ा झेली, एम्स के डॉक्टरों ने भी जबाव दे दिया था, उनका कहना था कि अब वो शायद ही कभी चल पाएंगे, द क्विंट की रिपोर्ट के अनुसार खुर्शीद अहमद ना सिर्फ ठीक हुए, बल्कि दोबारा से नौकरी भी ज्वाइन कर ली है।

जून 2017 में आतंकी हमला 
25 जून 2017 को चार आतंकियों ने सीआरपीएफ के दस्ते पर हमला किया था, जिसमें 8 जवान शहीद हो गये थे, जबकि 22 गंभीर रुप से घायल हो गये थे,
घायलों की सूची में हेड कांस्टेबल खुर्शीद अहमद का नाम भी शामिल था। जिसके बाद वो दो महीने आईसीयू में रहे, इसके बाद उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां पहुंचने के बाद उनके हालात में सुधार होने लगा। वो धीरे-धीरे खड़े होने लगे, कुछ दिनों बाद वॉकर की मदद से चलने लगे, अब एक छड़ी की मदद से आराम से चल फिर लेते हैं, इतना ही नहीं खुर्शीद ने दोबारा नौकरी भी ज्वाइन कर ली है।

दोबारा नौकरी ज्वाइन
खुर्शीद अहमद ने दोबारा ड्यूटी ज्वाइन कर लिया है, उन्हें पेपरवर्क में लगाया गया है, वो कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का काम देखते हैं, खुर्शीद उन सभी लोगों को शुक्रिया कहते हैं,
जिन्होने दोबारा उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में मदद की, वो इस स्थिति के लिये भगवान को भी खूब शुक्रिया अदा करते हैं।

राज्य सरकार ने नहीं की मदद
हालांकि खुर्शीद प्रदेश सरकार से नाराज दिखते हैं, उनका कहना है कि सीआरपीएफ ने मेरा इलाज कराया, लेकिन प्रदेश सरकार ने कोई मदद नहीं की,
उस आतंकी हमले को याद कर डर लगने के सवाल पर उन्होने कहा कि गोलियों से डर नहीं लगता, मरना तो एक दिन सबको है।

पत्नी भी है बेखौफ
खुर्शीद अहमद की तरह ही उनकी पत्नी भी बेखौफ हैं, उन्होने कहा कि मरने से क्या डरना, एक दिन तो सबको मरना है, अगर मौत आएगी, तो घर पर भी आ जाएगी,
इससे छुप कर भाग नहीं सकते, तो क्यों ना देश सेवा करते हुए जान दें, ताकि सब सलाम करे।