ट्रिपल तलाक और 370 के बाद अब इस पर बड़ा फैसला ले सकती है मोदी सरकार, लिखी जा चुकी है पटकथा

पिछले मोदी सरकार में संसदीय कार्य मंत्री रहे वेंकैया नायडू तमाम दलों से धर्मांतरण पर एक राय से कानून बनाने की अपील की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

ट्रिपल तलाक और ऑर्टिकल 370 के बाद अब मोदी सरकार धर्मांतरण विरोधी बिल लाने की तैयारी में है, कहा जा रहा है कि संसद के अगले सत्र में सदन में इसे रखने पर विचार किया जा रहा है, बीजेपी से जुड़े थिंक टैंक पहले से ही इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, धर्मांतरण की खबरें पहले पूर्वोत्तर, केरल और यूपी से आती थी, लेकिन अब हिंदी भाषी क्षेत्रों से भी ऐसी खबरें आने लगी है, कि डराकर, धोखे या लालच देकर जबरन लोगों का धर्म बदलवाया जाता है, सरकार अगले सत्र में ऐसे लोगों के लिये कानून ला सकती है।

लंबे समय से मुहिम
आपको बता दें कि पिछले मोदी सरकार में संसदीय कार्य मंत्री रहे वेंकैया नायडू तमाम दलों से धर्मांतरण पर एक राय से कानून बनाने की अपील की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका,
अब दोबारा मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस बिल को पास कराने पर विचार हो रहा है, बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने धर्मांतरण विरोधी कानून के लिये लंबी मुहिम चलाई है, उन्होने पीएम मोदी को भी पत्र लिखा है।

हिंदू हो रहे अल्पसंख्यक 
बीजेपी नेता ने कहा के देश के कई राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं, बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है, उपाध्याय के मुताबिक लक्ष्यद्वीप और मिजोरम में हिंदू अब सिर्फ 2.5 फीसदी,
नागालैंड में 8.75 फीसदी बचे हैं, मेघालय में 11 फीसदी, कश्मीर में 28 फीसदी, अरुणाचल में 29 फीसदी और मणिपुर में 30 फीसदी बचे हैं।

कमजोर कानून
अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि कुछ लोगों ने धर्मांतरण विरोधी और अंधविश्वास विरोधी कानून बनाया है, लेकिन ये कानून बेहद कमजोर हैं,
इसी वजह से धर्मांतरण और अंधविश्वास की घटनाएं कम नहीं हो रही है, वर्तमान सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून और एक प्रभावी अंधविश्वास विरोधी कानून बनाएं, अंधविश्वास फैलाने वालों की 100 फीसदी संपत्ति जब्त कर उन्हें आजीवन कारावास दे, तो इससे धर्मांतरण रुकेगी।