बल्लेबाजी कोच बांगर ने बताया, सेमीफाइनल में धोनी को सातवें नंबर पर भेजने का फैसला किसका था

टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच संजय बांगर ने इस मामले में नया खुलासा किया है, उन्होने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सेमीफाइनल में धोनी को सातवें नंबर पर भेजने का फैसला उनके अकेले का नहीं था।

आईसीसी विश्वकप 2019 के सेमीफाइनल में हारकर टीम इंडिया विश्वकप से बाहर हुई, उस मुकाबले में महेन्द्र सिंह धोनी को सातवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये भेजा गया था, धोनी और जडेजा ने अच्छी बल्लेबाजी की थी, हालांकि आखिरी के तीन ओवरों में दोनों ने अपना विकेट गंवा दिया और मैच फिनिश नहीं कर सके, धोनी को उस मुकाबले में सातवें नंबर पर भेजने की खूब आलोचना की गई थी, अब बल्लेबाजी कोच संजय बांगर ने इस पर चुप्पी तोड़ी है।

नया खुलासा 
टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच संजय बांगर ने इस मामले में नया खुलासा किया है, उन्होने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सेमीफाइनल में धोनी को सातवें नंबर पर भेजने का फैसला उनके अकेले का नहीं था,
उन्होने ये भी बताया है कि इस अहम फैसले मेंटीम के कौन-कौन लोग शामिल थे।

सामूहिक फैसला 
हिंदुस्तान टाइम्स को दिये इंटरव्यू में बल्लेबाजी कोच ने कहा कि मैं हैरान हूं, कि लोग इसके लिये मुझे जिम्मेदार बता रहे हैं, जबकि मैं निर्णय़ लेने वाली अकेली अथॉरिटी नहीं हूं,
हम सभी हालात को समझने के बाद फैसला लेते हैं, बांगर ने कहा कि ये एक सामूहिक फैसला था, मिडिल ऑर्डर को लचीला बनाने और 30 से 40 ओवरों के बीच खेल पर दबदबा बनाने के लिये धोनी को नीचे भेजा गया था।

विराट को पता था 
संजय बांगर ने कहा कि इस फैसले के बारे में टीम के सभी सदस्य अच्छे से जानते थे, यहां तक कि कप्तान कोहली ने सेमीफाइनल और अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबले के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि
धोनी को निचले क्रम में भेजने का फैसला लिया गया है, ताकि वो डेथ ओवर्स तक लय में आ सकें।

फिनिशर की भूमिका 
बांगर ने बताया कि जल्दी तीन विकेट गिर जाने के बाद दिनेश कार्तिक को पांचवें नंबर पर भेजने का फैसला ये सोचकर लिया गया था, कि कार्तिक विकेटों का पतन रोकेंगे,
साथ ही मैच फिनिश करने के लिये हमारा सबसे अनुभवी बल्लेबाज मौजूद रहेगा, बांगर के मुताबिक रवि शास्त्री ने भी इस मामले में कहा कि ये सामूहिक फैसला था, ऐसे में मुझे समझ नहीं आ रहा, कि लोगों के मन में ये धारणा कैसे बन गई, कि धोनी को सातवें नंबर पर भेजने का फैसला अकेले मेरा था।