NRC तो बहाना है, बीजेपी-जदयू इस बैकअप प्लान पर कर रही है काम
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक एनआरसी बीजेपी का कोर मुद्दा पहले से रहा है, 1980 के दशक से ही बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बीजेपी अभियान चला रही है।
बिहार में एनआरसी का मुद्दा गरमाता जा रहा है, बीजेपी इस मुद्दे को लगातार उठा रही है, इसे प्रदेश में भी लागू करने की मांग कर रही है, हालांकि इस पर जदयू ने साफ कह दिया है कि बिहार में एनआरसी की जरुरत नहीं है, जबकि राजद ने इस मसले पर बीजेपी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है, असम में एनआरसी की फाइनल सूची पर बीजेपी भी एकमत नहीं है, तो बिहार में इस पर सियासत क्यों शुरु हो गई है।विधानसभा चुनाव का मुद्दा
बिहार की राजनीति को करीब से देखने वालों का कहना है कि प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में बीजेपी मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि की राजनीति के बहाने अपने लिये बड़ा मौका देख रही है,
वहीं जदयू भी अपने तरीके से इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही है, दोनों ही सत्ताधारी पार्टियां अपना-अपना मौका देख रही है।
बीजेपी के लिये खास मौका
एक चर्चित वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि बीजेपी की राजनीति ही वोट बैंक की है, बिहार इसके लिये सॉफ्ट टारगेट हो सकता है, खासतौर पर बिहार के 4 जिलों कटिहार,
किशनगंज, पूर्णिया और अररिया में लगातार बढ रही मुस्लिम आबादी बीजेपी की इस राजनीति के लिये अवसर है।
बीजेपी का कोर मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक एनआरसी बीजेपी का कोर मुद्दा पहले से रहा है, 1980 के दशक से ही बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बीजेपी अभियान चला रही है,
हालांकि जदयू इस मुद्दे पर बीजेपी से अलग राय रखती है, एनआरसी समेत अल्पसंख्यक से जुड़े तमामे मुद्दे पर जदयू किनारा कर लेती है।
बिहार में एनआरसी मुद्दा नहीं
बिहार में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा निश्चित रुप से बड़ा मुद्दा है, लेकिन एनआरसी के मुद्दे पर बीजेपी असम में बुरी तरह विफल रही है, इसलिये इस मुद्दे में बिहार के संदर्भ में बहुत दम नहीं दिख रहा,
हालांकि राजनीतिक एक्सपर्ट का कहना है कि बिहार में बीजेपी अपने कोर मुद्दे को इसलिये जिंदा रखना चाहती है, क्योंकि उसे नीतीश कुमार पर पूरी तरह से भरोसा नहीं है, इसी वजह से बीजेपी ने बैकअप प्लान कर रखा है।



