हरियाणा की सियासत में भूकंप, बीजेपी का रथ रोकने के लिये हुड्डा और मायावती की नई चाल
हरियाणा में बसपा का दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से गठबंधन था, हालांकि कुछ दिन पहले मायावती ने गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया।
हरियाणा में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन जारी है, बीजेपी का रथ रोकने के लिये कांग्रेस ने इस बार बड़ी तैयारी की है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस बसपा के साथ मिलकर गठबंधन की तैयारी कर रही है, दोनों दलों के बीच बातचीत भी शुरु हो चुकी है,सूत्रों का दावा है कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की नवनियुक्त अध्यक्ष कुमार सेलजा ने बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात की है, इसके साथ ही कांग्रेस प्रचार समिति के प्रमुख और पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा भी मायावती से मिले हैं।
जेजेपी से गठबंधन
हरियाणा में बसपा का दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से गठबंधन था, हालांकि कुछ दिन पहले मायावती ने गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया,
6 सितंबर को ट्विटर पर इसका ऐलान करते हुए मायावती ने लिखा था कि बसपा एक राष्ट्रीय पार्टी है, सीट बंटवारे में जेजेपी का रवैया ठीक नहीं था, इसलिये स्थानीय नेताओं के सुझाव पर गठबंधन खत्म किया जाता है, ये गठबंधन एक महीने भी नहीं चला।
कुछ ही महीनों में इनेलो से कांग्रेस तक
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मायावती ने इनेलो से गठबंधन किया था, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होने ओपी चौटाला की पार्टी से गठबंधन तोड़ लिया,
बाद में बीजेपी से बगावत कर अलग पार्टी बनाने वाले राजकुमार सैनी के साथ हाथ मिला लिया, लेकिन चुनाव में कोई सफलता नहीं मिली, जिसके बाद वहां भी गठबंधन टूटा, अब चर्चा चल रही है, कि मायावती कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमा सकती है।
दलित वोटरों पर नजर
बीजेपी के लिये दलित वोट बैंक चिंता का विषय है, कांग्रेस ने अशोक तंवर की जगह कुमारी सेलजा को प्रदेश की कमान सौंपी है,
गुरमीत राम रहीम के खिलाफ खट्टर सरकार के फैसले भी परेशानी का सबब बन सकते हैं, क्योंकि राम रहीम के ज्यादातर फॉलोवर दलित ही हैं, ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि मायावती को अपने पाले में लाकर दलित वोट बैंक को साधा जाए।
कांग्रेस की रणनीति
हरियाणा की बदलती रणनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस नॉन जाट वोट बैंक को अपनी ओर खींचने में लगी हुई है, फिलहाल जाटों का वोट हुड्डा,
इनेलो और दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी के बीच बंटा हुआ है, कांग्रेस की कोशिश है कि दलित वोट बैंक को साधा जाए, बाकी हुड्डा की पकड़ जाट वोट बैंक पर है, मायावती के साथ आ जाने से दलित एकमुश्त वोट कर सकते हैं।




