अमित शाह के 'संदेश' के बाद बिहार में कयासबाजी शुरु, नीतीश कुमार के लिये राह आसान नहीं

राजनीतिक एक्सपर्ट के मुताबिक ये मैसेज खासतौर से जदयू और लोजपा जैसे सहयोगियों पर दबाव बढा सकता है, जो सीट बंटवारे और विवादित मुद्दों को लेकर बीजेपी से दो-दो हाथ करने को तैयार रहते हैं।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद भी शिनसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की जुगत में है, दूसरी ओर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने स्पष्ट कह दिया कि शिवसेना जो नई शर्तें रख रही थी, उसे मानना संभव नहीं था, इसलिये बीजेपी ने सरकार बनाने से मना कर दिया, दूसरी ओर झारखंड में लोजपा की मांगों को भी नहीं मानकर बीजेपी ने स्पष्ट संकेत दे दिये हैं, कि वो सहयोगियों की हर मांग के आगे नहीं झुकेंगे।

बिहार को लेकर कयासबाजी
महाराष्ट्र में शिवसेना और झारखंड में आजसू तथा लोजपा जैसी सहयोगियों के सामने बीजेपी के ना झुकने की खबरों के बीच बिहार की राजनीति को लेकर भी कयासबाजी शुरु हो गई है,
राजनीतिक एक्सपर्ट की नजर में बिहार में भी इसका असर दिखेगा, सियासत पर नजर रखने वालों का कहना है कि बीजेपी ने शिवसेना से रिश्ता तोड़कर ये संदेश दिया है कि सहयोगी के लिये एक हद तक तो समझौता किया जा सकता है, लेकिन अगर बात सीमा से बाहर जाएगी, तो बीजेपी कड़े फैसले भी ले सकती है।

सहयोगी दलों पर बढेगा दबाव
राजनीतिक एक्सपर्ट के मुताबिक ये मैसेज खासतौर से जदयू और लोजपा जैसे सहयोगियों पर दबाव बढा सकता है, जो सीट बंटवारे और विवादित मुद्दों को लेकर बीजेपी से दो-दो हाथ करने को तैयार रहते हैं,
खास तौर से ये इसलिये भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर काउंटडाउन शुरु हो चुका है, अब चुनाव में 1 साल से भी कम का समय रह गया है, ऐसे में यहां भी जदयू 50-50 की बात ना करे, इसलिये उन्हें पहले ही संदेश दे दिया गया है।

बीजेपी-जदयू गठबंधन को खतरा नहीं
बिहार की सियासत को समझने वाले लोगों का कहना है कि बीजेपी-जदयू गठबंधन को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि खुद पीएम मोदी और अमित शाह नीतीश की क्षमता से वाकिफ हैं,
इसलिये जब तक खुद नीतीश गठबंधन छोड़कर ना जाना चाहें, तब तक ये गठबंधन बरकरार रहेगा, इसके साथ ही सीएम की कुर्सी के लिये भी अमित शाह ने 2020 के लिये पहले ही नीतीश को ग्रीन सिग्नल दे दिया है, इसलिये खतरे का कोई सवाल नहीं है। लेकिन अगर खुद सुशासन बाबू कुछ बहाना बनाकर पलटी मार जाएं, तो राजनीति में कुछ भी कहा नहीं जा सकता।