लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद बिहार में सियासी भूकंप, मोदी के लिये खुशखबरी लाये नीतीश

उपेन्द्र कुशवाहा ने जब एनडीए छोड़ने का निर्णय लिया, तो उनके दोनों विधायक और सांसद नाराज थे, हालांकि इन बातों की फिक्र किये बिना कुशवाहा ने अपना फैसला लिया।

उपेन्द्र कुशवाहा ने जब एनडीए छोड़ने का निर्णय लिया, तो उनके दोनों विधायक और सांसद नाराज थे, हालांकि इन बातों की फिक्र किये बिना कुशवाहा ने अपना फैसला लिया।

लोकसभा चुनाव में बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, बीजेपी को अकेले 303 सीटें मिली है, तो एनडीए ने 353 का  आंकड़ा छुआ, मोदी की इस सुनामी ने विपक्ष के कई किलों को ढहा दिया, राहुल गांधी अमेठी तक नहीं बचा पाये, इसके साथ ही  हाल ही में बीजेपी से नाता तोड़ने वाले उपेन्द्र कुशवाहा को भी तगड़ा झटका लगा है, एक तो चुनाव में उन्हें एक भी सीट नहीं मिली, दूसरी ओर नीतीश ने एक और जोरदार झटका दिया है।

दोनों विधायक जदयू में शामिल 
दरअसल उपेन्द्र कुशवाहा कुछ महीने पहले तक मोदी सरकार में मंत्री थे, लेकिन चुनाव से 6 महीने पहले उन्होने पाला बदल लिया, हालांकि उनका ये दांव उल्टा पड़ गया,
2014 में कुशवाहा की पार्टी के तीन सांसद जीते थे, इस बार खाता भी नहीं खुला, इसके साथ ही 2015 विधानसभा चुनाव में रालोसपा के दो विधायक जीते थे, अब दोनों विधायकों ने कुशवाहा का साथ छोड़ नीतीश की पार्टी जदयू ज्वाइन कर लिया है।

जदयू में विलय
बिहार विधानसभा के स्पीकर ने दोनों विधायकों को जदयू में शामिल होने की इजाजत दे दी, जिसके बाद रालोसपा विधायक दल का जदयू विधायक दल में विलय हो गया,

आपको बता दें कि फिलहाल बिहार विधानसभा में राजद के 80, जदयू के 71, रालोसपा के 2 (अब जदयू में) और अन्य के खाते में 7 विधायक हैं, अब जदयू के विधायकों की संख्या 73 हो गई है।

विधायक थे नाराज 
बताया जा रहा था कि कुशवाहा ने जब एनडीए छोड़ने का निर्णय लिया, तो उनके दोनों विधायक और सांसद नाराज थे, हालांकि इन बातों की फिक्र किये बिना कुशवाहा ने अपना फैसला लिया,
जिसके बाद दोनों विधायक तब से ही जदयू के संपर्क में थे, अब नीतीश के इस दांव से कुशवाहा की पार्टी में एक भी निर्वाचित सदस्य नहीं बचा।

दोनों सीटों से हारे कुशवाहा 
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा दो सीटों से चुनाव लड़ रहे थे, हालांकि दोनों ही सीटों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा,
कभी नीतीश के उत्तराधिकारी कहे जाने वाले उपेन्द्र कुशवाहा अपने पॉलिटिकल मूव्स के लिये जाने जाते हैं, लेकिन इस बार लगता है कि उनका दांव उल्टा पड़ गया।