मुजफ्फरपुर रिपोर्टिंग पर आलोचनाओं से घिरी अंजना ओम कश्यप का जवाब, कही ये बात

खास बात ये है कि अंजना पर निशाना साधने वाले लोग ज्यादातर उनकी ही बिरादरी के यानी पत्रकार ही हैं।

पिछले दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी से हो रहे बच्चों की मौत पर खूब बवाल मचा, पत्रकारों के एक्सक्लूसिव कवरेज करने और सिस्टम के खिलाफ गुस्सा निकालने की वजह से खूब सुर्खियां बनी, तमाम टीवी चैनलों के पत्रकार मुजफ्फपुर के अस्पताल पहुंच गये, आजतक न्यूज चैनल की स्टार एंकर भी वहां पहुंची थी, जहां उन्होने ना सिर्फ पीड़ित परिवारों का दर्द दिखाया, बल्कि प्रदेश सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किये, अपनी कवरेज को मार्मिक रुप देने के लिये अंजना कई बार बोलते-बोलते इमोशनल भी हो गई, उनका गला रुंध गया, यहां तक तो सबकुछ ठीक था, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसके लिये सोशल मीडिया पर उन्हें खूब निशाना बनाया गया।

पत्रकारों ने ही निकाली भड़ास 
खास बात ये है कि अंजना पर निशाना साधने वाले लोग ज्यादातर उनकी ही बिरादरी के यानी पत्रकार ही हैं, दरअसल सवाल जवाब के लिये अंजना आईसीयू में घुस गई थी,
उन्होने ऑन ड्यूटी डॉक्टर को रोके रखा और बेहद तल्ख अंदाज में सवाल पूछे, अंजना के इस तेवर से डॉक्टर भी नाराज हो गये, उन्होने कहा कि क्या बात कर रही हैं आप, मैं राउंड पर था, क्या मैं यहां बैठा हुआ हूं।

सगारिका ने साधा निशाना 
देश की चर्चित वरिष्ठ पत्रकार और राजदीप सरदेसाई की पत्नी सगारिका घोष ने ट्विटर  पर लिखा, कि ये महिला लगातार पत्रकारिता को एक गलत नाम देती आ रही है,
इन्हें आम नागरिकों को धमकाने और नेताओं की खुशामद करने  के लिये पहचाना जाता है, बेहद निंदनीय।

कादम्बिनी शर्मा ने क्या लिखा 
एनडीटीवी की पत्रकार कादम्बिनी शर्मा ने लिखा, कि आईसीयू में जाकर नौटंकी एंकरिंग करने से और डॉक्टरों पर चिल्लाने से अगर बच्चे ठीक हो जाते, तो यही दवाई लिखी जाती,
ऐसी रिपोर्टिंग घटिया और गलत  है, इसी तरह लेखक और पूर्व पत्रकार शुभ्रास्था ने अंजना को खरी-खोटी सुनाई, उन्होने लिखा, कि तुम्हें शर्म आनी चाहिये अंजना, जिस तरह से तुमने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के साथ व्यवहार किया वो देखकर मुझे गुस्सा आया, ये पत्रकारिता के मुंह पर तमाचे की तरह है।

अंजना का जवाब
अपने ऊपर हो रहे हमलों के बाद अंजना ओम कश्यप ने भी जवाब दिया है, उन्होने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें आलोचनाओं की परवाह नहीं है, उन्होने जो किया वो आगे भी बार-बार करती रहेंगी, अंजना ने लिखा, कि अस्पताल में अप्रबंधन और बेरुखी का सच सामने लाना जरुरी था, है, रहेगा।
आईसीयू में आये बच्चों को अटेंड करना जरुरी था, है, रहेगा, प्रोपेगेंड वाले 108 बच्चों की मौत भूल गये, डॉक्टरों के लिये मगरमच्छी सहानुभूति दिखाने वालों को प्रोपेगेंडा बंद करना चाहिये, फिर याद दिला दूं, 108 बच्चों की मौत हो चुकी है। हालांकि कौन सही है कौन गलत है, ये अलग मुद्दा हो सकता है, लेकिन इतना तो जरुर है, कि अंजना को अस्पताल में अधिकारी की तरह पेश नहीं आना चाहिये थे, पत्रकार सवाल पूछ  सकता है, ये उनका अधिकार है, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होती है।