रणनीतिकार के सामने बेबस दिख रही राजनीति, प्रशांत किशोर पर फिरकी ले रहा जदयू-बीजेपी रिश्ता
प्रशांत किशोर के इस चाल का जवाब ना तो जदयू के पास है और ना ही बीजेपी के पास, प्रशांत किशोर ने एक चुनावी रणनीतिकार की हैसियत से ममता बनर्जी से हाथ मिलाया है।
प्रशांत किशोर के इस चाल का जवाब ना तो जदयू के पास है और ना ही बीजेपी के पास, प्रशांत किशोर ने एक चुनावी रणनीतिकार की हैसियत से ममता बनर्जी से हाथ मिलाया है।
जदयू उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बीजेपी के सबसे बड़ी राजनीतिक दुश्मन ममता बनर्जी के साथ हाथ मिला लिया है, पीके के इस कदम ने सीएम नीतीश कुमार को भी असहज कर दिया है, हालांकि जदयू नेताओं ने इस मामले पर सफाई दी है और इसे उनका निजी मामला बताया है। आपको बता दें कि कहा जा रहा हैं कि 2021 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पीके टीएमसी के लिये रणनीति बनाएंगे।बीजेपी-जदयू में मनमुटाव
जरा बिहार की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर ध्यान दीजिए, मोदी सरकार में मनपसंद मंत्री पद नहीं मिलने से नीतीश नाराज हैं,
ईद से पहले इफ्तार के बहाने गिरिराज सिंह ने सुशासन बाबू पर निशाना साधा, जिससे दोनों पार्टियों में तल्खी बढ गई, हालांकि कथित तौर पर अमित शाह के दखल के बाद गिरिराज सिंह वाला मामला शांत होता दिख रहा है। लेकिन अब पीके ने ऐसा पासा फेंका है, जिससे दोनों पार्टियों में मनमुटाव घटने की बजाय बढने की संभावना है।
पीके की चाल का जवाब नहीं
फिलहाल प्रशांत किशोर के इस चाल का जवाब ना तो जदयू के पास है और ना ही बीजेपी के पास, प्रशांत किशोर ने एक चुनावी रणनीतिकार की हैसियत से ममता बनर्जी से हाथ मिलाया है,
करीब दो घंटे तक टीएमसी सुप्रीमो और प्रशांत किशोर के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद सियासी पारा चढ गया है।
जदयू कर रही किनारा
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी ने जदयू और बीजेपी के बीच किसी भी तरह के अलगाव को खारिज किया है,
उन्होने कहा कि केन्द्रीय मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिलने से ना तो उनकी पार्टी नाराज है और ना ही एनडीए छोड़कर जाएगी, वहीं जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि पीके पर फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष लेंगे, संभव है कि एक चुनावी रणनीतिकार के हैसियत से पीके ने ममता बनर्जी से मुलाकात की हो, इस मसले पर पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।


