जापानी बुखार के खिलाफ रंग ला रही योगी सरकार की लड़ाई, मरीजों की संख्या घट रही

योगी सरकार के प्रयासों की वजह से पूर्वांचल का काल कहे जाने वाले जापानी इंसेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से लड़ाई में अभूतपूर्व सफलता मिली है

योगी सरकार के प्रयासों की वजह से पूर्वांचल का काल कहे जाने वाले जापानी इंसेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से लड़ाई में अभूतपूर्व सफलता मिली है।

बिहार के मुजफ्फरपुर में हो रहे बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रखा है, मेन स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक इसी बात की चर्चा हो रही है, केन्द्रीय मंत्री से प्रदेश के सीएम तक ने मुजफ्फरपुर का दौरा कर हाल चाल जानने की कोशिश की, कुछ साल पहले तक गोरखपुर भी इसी वजह से सुर्खियों में था, लेकिन सीएम योगी की कोशिश और स्वास्थ्य महकमे के चौकन्ना रहने की वजह से इस बार गोरखपुर गलत कारणों से सुर्खियों में नहीं है।

पूर्वांचल का काल
योगी सरकार के प्रयासों की वजह से पूर्वांचल का काल कहे जाने वाले जापानी इंसेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से लड़ाई में अभूतपूर्व सफलता मिली है,
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या में इस बार करीब चार गुणा की कमी आई है। फिर भी स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से चौकन्ना है।

साल 2019 का आंकड़ा 
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2016 में पूर्वांचल समेत अन्य इलाकों में एईएस के 3911 मरीज मिले थे, 17 जून 2018 को ये आंकड़ा 1050 रहा,
जबकि इस बार ये संख्या 440 तक में सिमट गई  है। एईएस ने 2018 में 98 बच्चों की जान ली थी, लेकिन इस बार 16 मौतें हुई है। अगर जेई की बात करें, तो 2016 में 442 मामले सामने आये थे, जिनमें 74 बच्चों की मौत हो गई थी, वहीं 2018 में 64 मामले सामने आये, जिसमें तीन की मौत हुई, इस बार 2019 में अब तक 25 केस आये हैं, जिनमें एक को नहीं बचाया जा सका।

सरकार की पहल रंग लाई
2017 में सीएम योगी ने शपथ लेने के बाद ही एईएस और जापानी इंसेफलाइटिस के लिये एक फुलप्रूथ योजना बनाने को कहा था, सरकार ने इसके लिये विशेष गाइडलाइन तैयार किया,
इस लड़ाई से लड़ने के लिये सरकार ने 3.5 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया, जिवमें एसीएमओ, आशा, एएनएम, ग्राम प्रधान, शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविका, बीएसए, एबीएसए, सीडीपीओ और एंबुलेंस स्टाफ भी शामिल था।

दस्तक अभियान
इसके साथ ही योगी सरकार ने दस्तक अभियान के तहत विशेष संचारी रोक नियंत्रण पखवारों का आयोजन किया, साफ-सफाई और टीकाकरण पर जोर दिया,
यूपी सरकार ने बीते 2 साल में लक्ष्य से ज्यादा वैक्सिनेशन का काम किया, अस्पतालों में भी सुविधा बढाई गई, पीआईसीयू और मिनी पीआईएसयू को अपग्रेड किया गया।