पहले करते थे मजदूरी, फिर बनें चौकीदार, अब उसी कॉलेज में पास किया एंट्रेस एग्जाम

2014 से विश्वविद्यालय की रखवाली कर रहे राजमल मीना ने गार्ड रहते हुए ही यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम किया और पास भी हो गये।

देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) नई दिल्ली में इस बार एक ऐसे छात्र ने लिखित परीक्षा पास किया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। 2014 से विश्वविद्यालय की रखवाली कर रहे राजमल मीना ने गार्ड रहते हुए ही यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम किया और पास भी हो गये। शायद मीना ने कभी सोचा भी नहीं होगा, कि जिस यूनिवर्सिटी में वो चौकीदारी कर रहे हैं, वहीं पर वो छात्र बनकर पढाई भी कर सकेंगे।

दिहाड़ी मजदूर के बेटे 
राजमल मीना ने बीए रसियन (ऑनर्स) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिये परीक्षा पास किया है, वो दिहाड़ी मजदूर के बेटे हैं, राजमल मूल रुप से राजस्थान के भजेरा गांव के रहने वाले हैं,
लेकिन उन्होने बीच में ही पढाई छोड़ दी थी, क्योंकि उनके गांव से सबसे पास का कॉलेज भी करीब तीस किमी दूर था, साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिये पिता जी के काम में हाथ बंटाना पड़ता था।

ग्रेजुएशन पूरा किया 
भले आर्थिक रुप से राजमल कमजोर हो, लेकिन पढाई और सीखने की ललक कभी कम नहीं हुई, पिछले साल ही उन्होने राजस्थान विश्वविद्यालय से डिस्टेंस लर्निंग की मदद से पॉलिटिकल साइंस,
हिस्ट्री और हिंदी में अपने ग्रेजुएशन पूरा किया है, अब वो आगे पढना चाहते हैं।

3 बच्चियों के पिता  
राजमल मीना करीब 34 साल के हैं, और 3 बच्चियों के पिता हैं, उन्होने बताया कि जब जेएनयू में पढाई का माहौल देखा, तो खुद को रोक नहीं सका,
न्यूजपेपर और मोबाइल ऐप्प की मदद से एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी की, कुछ छात्रों ने भी नोट्स देकर मदद किया, अपने ड्यूटी के दौरान और उसके बाद पढाई कर परीक्षा पास कर ली, हालांकि अब थोड़ा परेशान हूं, क्योंकि यूनिवर्सिटी में रेगुलर कोर्स करते हुए फुल टाइम ड्यूटी करने में मुश्किल होगा, और परिवार का खर्च उठाना भी प्राथमिकता है, हालांकि यूनिवर्सिटी के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर नवीन यादव ने कहा कि मीना की हर संभव मदद की जाएगी।