करगिल विजय समारोह के दौरान भावुक हुए पीएम मोदी, पाकिस्तान को लेकर कही बड़ी बात
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि करगिल विजय अदम्य साहस की जीत है, भारत की मर्यादा और अनुशासन की जीत थी।
करगिल विजय के बीस साल पूरे होने के मौके पर शनिवार को देश की राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत भारतीय सेना प्रमुख बिपिन रावत समेत कई लोगों ने शिरकत किया, ये पहला मौका है, जब करगिल विजय दिवस के कार्यक्रम में किसी पीएम ने शिरकत किया और देश को संबोधित किया।किसी के दबाव में ना आएंगे
पीएम ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा के लिये ना किसी का दबाव काम करेगा, ना किसी का प्रभाव और ना ही किसी तरह का अभाव होगा,
पीएम ने कहा कि चाहे अरिहंत के जरिये परमाणु त्रिकोण की स्थापना हो या फिर ए सैट परीक्षण, हमने दबावों की परवाह किये बिना कदम उठाये हैं, और आगे भी उठाते रहेंगे, पीएम ने साफ कहा गहरे समंदर से लेकर असीम अंतरिक्ष तक जहां-जहां भी देश के हितों की सुरक्षा की जरुरत होगी, भारत अपने सामर्थ्य का भरपूर इस्तेमाल करेगा।
भावुक हुए पीएम
इस कार्यक्रम के जरिये पीएम मोदी वहां मौजूद सैनिकों के परिवारों और देशवासियों को संबोधित कर रहे थे, उन्होने कहा कि आज देश सैनिकों की शौर्यगाथा को याद कर रहा है,
करगिल की शौर्यगाथा से आने वाली पीढियां प्रेरित होगी, पीएम ने कहा कि जवानों की वीरता और पराक्रम को देख आंखें भर आई, पीएम इस मौके पर भावुक भी हो गये।
करगिल गये थे नरेन्द्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि करगिल विजय अदम्य साहस की जीत है, भारत की मर्यादा और अनुशासन की जीत थी,
उन्होने आगे बोलते हुए कहा कि 2014 में पीएम बनने के बाद करगिल जाने का मौका मिला, इससे पहले 1999 में भी युद्ध के दौरान करगिल गया था, विजय स्थल मेरे लिये तीर्थ के समान है, पीएम ने कहा कि करगिल पर हर भारतीय जवान तिरंगा फहरना चाहता था, करगिल में जवानों के लिये खूब रक्तदान हुआ था, तो बच्चों ने अपनी गुल्लकें तोड़ दी थीं।
पाक ने हमेशा छल किया
पीएम मोदी ने पड़ोसी मुल्क पर बोलते हुए कहा कि कुछ देश आतंकवाद को फैलाने के लिये हमेशा छद्म युद्ध का सहारा ले रहे हैं, पाक ने हमेशा छल का सहारा लिया है,
लेकिन इस बार हमने उनका छल चलने नहीं दिया, हमने छल को छलनी कर दिया, पाक को भारत से ऐसे जबाव की उम्मीद नहीं थी, भारत की रणनीतिक बदलाव दुश्मन पर भारी पड़ा, पाक ने दुस्साहस कर 1999 में सीमाओं को फिर से खींचने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने उनके नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया।



