शीला दीक्षित को मारने की थी साजिश, 2 बच्चों की चली गई थी जान, इस तरह बची थी पूर्व सीएम

शीला दीक्षित मूल रुप से पंजाब के कपूरथला की थी, उनकी पढाई लिखाई दिल्ली में हुई और शादी यूपी के एक राजनीतिक परिवार में हुई।

दिल्ली की पूर्व सीएम और पूर्व केन्द्रीय मंत्री शीला दीक्षित का शनिवार को निधन हो गया, शनिवार सुबह उन्हें ओखला स्थित एस्कॉर्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, दोपहर में उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्होने दुनिया को अलविदा कह दिया। पूर्व सीएम लंबे समय से बीमार चल रही थी, हालांकि आपको बता दें कि साल 1985 में भी उनकी जान जाते-जाते बची थी, तब किसी की भूख ने उनकी जान बचा ली थी।

पंजाब प्रचार के लिये पहुंची थी 
आपको बता दें कि शीला दीक्षित मूल रुप से पंजाब के कपूरथला की थी, उनकी पढाई लिखाई दिल्ली में हुई और शादी यूपी के एक राजनीतिक परिवार में हुई,
25 सितंबर 1985 को पंजाब में विधानसभा चुनाव चल रहे थे, तब शीला जी को चुनाव प्रचार में लगाया गया था, प्रचार के आखिरी दिन अंतिम रैली खत्म करने के बाद वो बिहार के एक सांसद की कार में बैठकर बटाला से अमृतसर जाने के लिये निकली।

ड्राइवर ने कहा भूख लगी है
तब कार में शीला जी, वो सांसद, एक सुरक्षाकर्मी के अलावा ड्राइवर था, कुछ देर बाद ही ड्राइवर ने शीला दीक्षित से कहा कि भूख लगी है, अभी खाना खा लेते हैं,
क्योंकि अमृतसर पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो जाएगी, जिस पर शीला जी ने सहमति दे दी, तो ड्राइवर ने कार एक रेस्तरां के बाहर रोकी। ड्राइवर भोजन करने लगा, तो शीला दीक्षित ने अंदर बैठकर सॉफ्ट ड्रिंक मंगवाया, जैसे ही उन्होने पहला घूंट लिया, कि तभी जोरदार धमाका हुआ, ये धमाका उसी कार में हुआ था, जिसमें पूर्व सीएम सफर कर रही थीं।

दो बच्चों की मौत 
धमाका इतना जोरदार था, कि कार के टुकड़े-टुकड़े हो गये, अगर ड्राइवर ने भोजन के लिये गाड़ी ना रोकी होती, तो शायद उस दिन बड़ी अनहोनी हो जाती,
उस बम धमाके में शीला दीक्षित तो बच गई थी, लेकिन कार के पास मौजूद दो बच्चों की मौत हो गई थी, बाद में जब जांच की गई, तो पता चला कि कार में टाइम बम फिट किया गया था, मतलब कि शीला दीक्षित की हत्या की साजिश रची गई थी।