क्या बीजेपी से फिर 'तलाक' लेना चाहते हैं नीतीश कुमार, NRC पर पार्टी के बयान से हड़कंप

नीतीश के खासमखास और जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर लिखा है कि एनआरसी की फाइनल सूची ने लाखों लोगों को अपने ही देश में विदेशी बना दिया है।

असम में बीते शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच एनआरसी सूची जारी कर दी गई है, फाईनल लिस्ट में तीन करोड़ 11 लाख 21 हजार चार लोगों का नाम है,
जबकि करीब 19 लाख से ज्यादा लोगों को इसमें स्थान नहीं दिया गया है, कहा जा रहा है कि कुछ लोग अभी ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं, कि उनका नाम छूट गया है, असम सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता हिमंत बिस्वा ने कहा कि इसका पुर्नमूल्यांकन होना चाहिये, उधर बीजेपी की सहयोगी पार्टी जदयू ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना की है।

जदयू ने की आलोचना
नीतीश के खासमखास और जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर लिखा है कि एनआरसी की फाइनल सूची ने लाखों लोगों को अपने ही देश में विदेशी बना दिया है,
जब राजनीतिक दिखावे और भाषण कला को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जटिल मुद्दों का बिना रणनीति और व्यवस्थागत चुनौतियों पर ध्यान दिये बिना गलती से एक समाधान के रुप में ले लिया जाता है, तको लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

बीजेपी से अलग राह
आपको बता दें कि भले जदयू बीजेपी के साथ हो, लेकिन विभिन्न मुद्दों पर वो अलग ही राह पकड़ ले रही है, पिछले दिनों तीन तलाक से लेकर ऑर्टिकल 370 के मुद्दे पर नीतीश की पार्टी ने बीजेपी का साथ नहीं दिया,
कहा जा रहा है कि अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिये नीतीश की पार्टी फूंक-फूंक कर कदम आगे बढा रही है।


ममता दीदी ने भी साधा निशाना
एनआरसी की फाइनल लिस्ट को टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने विफलता बताया है,
उन्होने कहा कि कुछ लोग इसे लेकर राजनीतिक फायदा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, उन लोगों की मंशा उजागर हो चुकी है, इसके साथ ही ममता बनर्जी ने बड़ी संख्या में बंगालियों को एनआरसी की सूची से बाहर रखे जाने पर चिंता भी जाहिर की है।