सपा-बसपा के सामने यूपी उपचुनाव में ये है बड़ी चुनौती, भैया और बहन जी के साख की लड़ाई

यूपी की सियासत पर नजर रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि वर्तमान में विपक्ष में बिखराव की स्थिति बनी हुई है, इसकी वजह से चुनाव नतीजे अनुकूल नहीं होंगे।

यूपी में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब सभी राजनीतिक पार्टियां उपचुनाव में ताल ठोंकेगी, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद यूपी में होने वाले विधानसभा उपचुनाव में पहली बार मोदी सरकार की लिटमस टेस्ट होगा, पहली बार उपचुनाव में भाग्य आजमा रही बसपा के लिये भी ये अस्तित्व की लड़ाई है, उपचुनाव के लिये फिलहाल सपा ने तीन और बसपा ने 11 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।

विपक्ष में बिखराव की स्थिति 
यूपी की सियासत पर नजर रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि वर्तमान में विपक्ष में बिखराव की स्थिति बनी हुई है, इसकी वजह से चुनाव नतीजे अनुकूल नहीं होंगे,
विपक्ष को उपचुनाव के परिणाम से झटका लग सकता है, फिलहाल बीजेपी ने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नहीं की है, बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने बताया कि 30 सितंबर से पहले उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया जाएगा।

बीजेपी के लिये चुनौती 
उत्तर प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि सभी राजनीतिक दल उपचुनाव में जोर-आजमाइश करने को तैयार है, सत्तारुढ बीजेपी की बात हो या सपा, बसपा या कांग्रेस,
सभी इस बार उपचुनाव में दांव लगाने को तैयार है, सत्तारुढ बीजेपी के लिये जहां इस उपचुनाव में अपनी सीटें बचाने की चुनौती है, वहीं विपक्षी दलों के लिये ये साख बचाने वाला चुनाव कहा जा रहा है।

इन सीटों पर उपचुनाव
हमीरपुर सीट पर चुनाव का ऐलान पहले ही हो चुका है, अब 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, इनमें से फिरोजाबाद की टुंडला को छोड़कर बाकी सीटों पर चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया है, जिसमें रामपुर, सहारनपुर की गंगोह,
अलीगढ की इगलास, लखनऊ कैंट, बाराबंकी की जैदपुर, चित्रकूट की मानिकपुर, बहराइच की बलहा, प्रतापगढ, हमीरपुर, मऊ की घोसी सीट और अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट शामिल है, इन 12 में से रामपुर सीट सपा, जलालपुर सीट बसपा के पास थी, बाकी पर बीजेपी का कब्जा था।