'रंगमंच' की दुनिया को बदलने की कोशिश, ये ग्रुप छोड़ रहा छाप
रंगमंच का ये समूह बाकी समूहों से अलग इसलिए भी है, क्योंकि यहां प्रतिभागियों से अभिनय प्रशिक्षण के नाम पर मोटी रकम नहीं वसूली जाती।
वैसे तो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सैकड़ों रंगमंच समूह सक्रिय हैं, हर ग्रुप की अपनी अलग खासियत है, कोई समाज में होने वाली चीजों को अपनी कला के माध्यम से लोगों के बीच ले जाता है, तो कुछ ग्रुप का मकसद सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना भर है। ऐसा ही एक रंगमंच आरकेडी है, जो तेजी से इस दुनिया में अपना नाम बना रहा है, इसके अपने कई नाटकों से लोगों के दिल जीते हैं।इस ग्रुप की स्थापना करीब एक साल पहले हुई थी, वैसे तो इस समूह द्वारा किये गये नाटकों की सूची लंबी नहीं है, लेकिन ग्रुप के नाटकों ने सकारात्मक छाप छोड़ी है,
पहला शेक्सपीयर का सुप्रसिद्ध नाटक 'ओथेलो' दूसरा हास्य नाटक बिच्छू, इन दोनों ही नाटकों से इस ग्रुप ने लोगों के दिलों-दिमाग पर अपनी छाप छोड़ी।
रंगमंच का ये समूह बाकी समूहों से अलग इसलिए भी है, क्योंकि यहां प्रतिभागियों से अभिनय प्रशिक्षण के नाम पर मोटी रकम नहीं वसूली जाती, ये समूह कला के सिद्धांतों को जीवंत रखते हुए, उन सभी को काम करने का मौका देना चाहती है, जो इस विधा को सीखने के लिये अच्छी खासी राशि खर्च करने में असमर्थ है।
समूह के संस्थापक और निदेशक जितेन्द्र चौथानी ने बताया कि वो पिछले 15 सालों से रंगमंच और सिनेमा दोनों का काम करते आ रहे हैं, उनके मुताबिक रंगमंच बहुत सी जगहों पर आज भी गुमनामी में है, आरकेडी की नींव इसी विचार के साथ रखा गया था कि वो रंग मंच को उन स्थानों तक भी पहुंचाएंगे, जहां लोगों ने सिर्फ इसका नाम सुना है। ज्यादा जानकारी के लिये नीचे लिंक पर क्लिक करें
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