महाराष्ट्र चुनाव परिणाम के बाद खेल शुरु, शिवसेना के बयान से चढा सियासी पारा, बीजेपी इन्हें साधने में लगी

महाराष्ट्र में बीजेपी को 100 सीटें मिली है, जबकि शिवसेना 57 सीटों पर जीती है, वहीं एनसीपी 51 और कांग्रेस 38 सीटें जीतने में सफल रही है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे करीब-करीब साफ हो चुके हैं, उम्मीद के अनुसार बीजेपी-शिवसेना गठबंधन फिर से सत्ता में लौटती दिख रही है, 288 विधायकों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 144 है, बीजेपी को उम्मीद से कम सीटें मिली है, ऐसे में शिवसेना ने अभी से ही शर्ते रखना शुरु कर दिया है, लग रहा है इस बार महाराष्ट्र में बीजेपी के लिये सरकार चलाना आसान नहीं होगा, ऐसे में महाराष्ट्र में सरकार बनाने की तीन तस्वीरें सामने आ रही है।

क्या है आंकड़ा
महाराष्ट्र में बीजेपी को 100 सीटें मिली है, जबकि शिवसेना 57 सीटों पर जीती है, वहीं एनसीपी 51 और कांग्रेस 38 सीटें जीतने में सफल रही है,
रुझानों के बाद शिवसेना और एनसीपी की ओर से जारी बयानों ने सियासत को दिलचस्प बना दिया है, ऐसे में सरकार बनाने के लिये तीन विकल्प बचते हैं।

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन
सबसे पहले विकल्प में बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन है, ये दोनों मिलकर चुनाव लड़े थे, बहुमत के आंकड़े को भी पार कर चुके हैं, दोनों मिलकर 157 सीटें जीतते दिख रहे हैं,
हालांकि ये तस्वीर जितनी साफ दिख रही है, इसके पीछे की सच्चाई उतनी ही धुंधली है, क्योंकि अब शिवसेना सीएम पद की मांग कर सकती है।

बड़ा भाई
शिवसेना महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन में लंबे समय से खुद को बड़ा भाई कहती रही है, इसके साथ ही उनकी नजर सीएम की कुर्सी पर है, ये पहला चुनाव है,
जब शिवसेना बीजेपी से कम सीटों पर चुनाव लड़ रही है, पिछली बार उन्हें 122 सीटें मिली थी, लेकिन इस बार 104 से संतोष करना पड़ा, ऐसे में शिवसेना बीजेपी के खिलाफ मौके की तलाश में है, रुझानों के बाद शिवसेना का जो बयान आया, वो बीजेपी की चिंता बढाने वाला है, शिवसेना ने सीएम पद पर दावा करते हुए आधे मंत्री पद की भी मांग की है। साथ ही ढाई-ढाई साल के  लिये सीएम पद का सुझाव दिया है, जाहिर सी बात है कि बीजेपी को ये शर्ते मंजूर नहीं होगा।

एनसीपी के साथ गठबंधन
शिवसेना की धमकी के बाद बीजेपी दूसरा विकल्प भी आजमा सकती है, बीजेपी शिवसेना को झटककर शरद पवार की पार्टी एनसीपी को साथ मिला सकती है,
एनसीपी ने भी 50 से ज्यादा सीटें जीती हैं, ऐसे में अगर एनसीपी बीजेपी के साथ आ जाती है,  तो आसानी से सरकार बन सकती है, 2014 में चुनाव हारने के बाद विधानसभा में एनसीपी ने कई बार बीजेपी का साथ दिया है।