चुनाव परिणाम देख बदल गये शिवसेना के सुर, बीजेपी पर निशाना साधते हुए कही ऐसी बात

सामना में लिखा गया है कि महाराष्ट्र की जनता ने निश्चित करके ही ये नतीजे दिये हैं, फिर इसे महाजनादेश कहो या कुछ और, ये जनादेश है महाजनादेश नहीं, इसे स्वीकार करना पड़ेगा।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होते ही शिवसेना के सुर बदल गये हैं, शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है, शिवसेना ने लिखा है ये महाजनादेश नहीं है, संपादकीय में ये भी लिखा गया है कि चुनाव नतीजे देखने के बाद ये साफ हो गया, कि महाराष्ट्र की जनता का रुझान सीधा और साफ है, अति नहीं उन्माद नहीं वर्ना समाप्त हो जाओगे, ऐसा जनादेश ईवीएम की मशीन से बाहर आया।

ईवीएम से कमल ही बाहर आएंगे शिवसेना ने सामना में लिखा है, ईवीएम से सिर्फ कमल ही बाहर आएंगे, ऐसा आत्मविश्वास सीएम देवेन्द्र फडण्वीस को आखिरी क्षण तक था, लेकिन 164 में से 63 सीटों पर कमल नहीं खिला,
अगर पूरे महाराष्ट्र के नतीजों को देखें, तो शिवसेना-बीजेपी गठबंधन को सरकार बनाने लायक बहुमत मिल चुका है, आंकड़ों का खेल संसदीय लोकतंत्र में चलता रहता है।

जनादेश है महाजनादेश नहींसामना में लिखा गया है कि महाराष्ट्र की जनता ने निश्चित करके ही ये नतीजे दिये हैं, फिर इसे महाजनादेश कहो या कुछ और, ये जनादेश है महाजनादेश नहीं, इसे स्वीकार करना पड़ेगा,
जनता के फैसले को स्वीकार करके बड़प्पन दिखाना पड़ता है।

अति आत्मविश्वास में मत आओआगे लिखा गया है कि महाराष्ट्र में 2014 की अपेत्रा अलग नतीजे आये हैं, 2014 में गठबंधन नहीं थी, लेकिन इस बार गठबंधन के बावजूद सीटें कम हुई, कांग्रेस-एनसीपी मिलकर 100 सीटों तक पहुंच गई,

ये एक प्रकार से सत्ताधीशों को सबक है, धौंस, दहशत और सत्ता की मस्ती से प्रभावित ना होते हुए जनता ने जो मतदान किया, उसके लिये उनका अभिनंदन। दूसरे शब्दों में कहें तो अतिआत्मविश्वास में मत आओ, सत्ता की धौंस दिखाओगे, तो याद रखो, राज्य की जनता ने ऐसा जनादेश दिया है।

दल-बदलुओं पर भी निशाना बीजेपी पर निशाना साधते हुए आगे लिखा गया है कि दूसरे दलों में सेंध लगाकर या दल बदलकर करवा कर बड़ी जीत हासिल की जा सकती है, जनता ने इस भ्रम को तोड़ दिया है,
पार्टी बदलकर टोपी बदलने वालों को जनता ने घर भेज दिया है, शरद पवार की पार्टी ने 50 का आंकड़ा पार कर लिया, तो बीजेपी 122 से 102 पर आ गई।