भीख मांगने वाले बच्चों के हाथों में कटोरे की जगह कलम थमा रहा ये कांस्टेबल, प्रयास की हो रही खूब तारीफ

धर्मवीर जाखड़ ने चुरु जिले में एक स्कूल खोला है, जिसका नाम अपनी पाठशाला (आपणी पाठशाला) रखा है, यहां गरीब और आर्थिक रुप से कमजोर स्थिति वाले बच्चों को मुफ्त में पढाया जाता है।

छोटी-छोटी बातें ही समाज में बड़ा बदलाव लाती हैं, बड़े स्तर पर सुधार के लिये छोटी पहल करनी होती है, किसी देश में बदलाव शिक्षा और पढाई के जरिये ही आ सकता है, राजस्थान के चुरु जिले में पुलिस विभाग में कांस्टेबल पद पर तैनात धर्मवीर जाखड़ ने ऐसा काम किया है, जिसकी खूब तारीफ हो रही है, दरअसल उन्होने चुरु जिले में कचरा बीनने वाले और भीख मांगने वाले बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिये बड़ा काम किया है।

बच्चों के लिये खोला स्कूल
धर्मवीर जाखड़ ने चुरु जिले में एक स्कूल खोला है, जिसका नाम अपनी पाठशाला (आपणी पाठशाला) रखा है, यहां गरीब और आर्थिक रुप से कमजोर स्थिति वाले बच्चों को मुफ्त में पढाया जाता है,
इसकी शुरुआत 1 जनवरी 2016 को हुई थी, ये स्कूल चुरु में महिला पुलिस थाने के पास है, स्कूल में करीब  450 बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जा रही है, स्कूल में खासतौर से ऐसे बच्चों को पढाया जाता है, जो पहले सड़क पर भीख मांगते थे, या कचरा उठाते थे, स्कूल की तरफ से  ही बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें, बैग और दूसरे जरुरी सामान भी दी जाती है।

ऐसे की शुरुआत
धर्मवीर ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब मैंने ऐसे बच्चों से बात की, तो उन्होने बताया कि उनके ना तो पैरेंट्स हैं और  ना रिश्तेदार, शुरुआत में उन्हें लगा कि बच्चे झूठ बोल रहे हैं,
जिसके बाद उन्होने खुद बस्ती जाकर तसल्ली की, तो पता चला कि बच्चे सच बोल रहे हैं, जिसके बाद मैंने महसूस किया, कि अगर मैं इनकी मदद नहीं करुंगा, तो शायद ये पूरी जिंदगी भीख मांगने में ही खराब करेंगे, फिर मैंने उन्हें रोज 1 घंटे पढाना शुरु किया, फिर इन बच्चों के लिये स्कूल खोल दिया।

दूसरे भी कर रहे मदद
कांस्टेबल ने बताया कि बच्चे रोजाना स्कूल आएं और बीच में पढाई ना छोड़ें, इसके लिये बच्चों के माता-पिता से नियमित तौर पर बात की जाती है, इस अच्छे काम में धर्मवीर की मदद दो महिला कांस्टेबल भी करती हैं,
धर्मंवीर ने बताया कि यहां यूपी और बिहार के कई अप्रवासी मजदूर रहते हैं, हम उनके बच्चों को पढने के लिये प्रेरित करते हैं, ताकि बड़ा होकर वो अपने माता-पिता की आर्थिक तंगी दूर कर सकें।

कचरा बीनने की अनुमति 
धर्मवीर ने बताया कि कुछ बच्चों को कचरा बीनने की अनुमति दी है, क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें स्कूल नहीं आने देते, इसलिये हमने बच्चों को स्कूल के बाद कचरा बीनने की अनुमति दी है,
ताकि कम से कम वो स्कूल तो आएं, धर्मवीर 2011 में राजस्थान पुलिस में भर्ती हुए थे, अकेले स्कूल चलाना उनके लिये बहुत महंगा है, क्योंकि इसके महीने का खर्च करीब डेढ लाख रुपये है, इसलिये फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डोनेशन इकट्ठा कर स्कूल चलाते हैं,  पहले इस काम में धर्मवीर और कुछ कास्टेबल थे, अब उनका पूरा स्टाफ और चुरु जिला प्रशासन भी उनका साथ दे रहा है।