शिवसेना को समर्थन देने पर कांग्रेस में दो फाड़, हो सकता है 'खेल'

विरोध कर रहे नेताओं का तर्क है कि शिवसेना जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ और कट्टर हिंदुत्व की राजनीति करती रही है, उन्हें समर्थन करना कांग्रेस के लिये आत्मघाती हो सकता है।

शिवसेना और एनसीपी की संभावित सरकार को समर्थन देने के फैसले पर कांग्रेस के भीतर से ही विरोध से सुर उठने लगे हैं, महाराष्ट्र से आने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केन्द्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए शिवसेना के समर्थन करने का विरोध किया, इसके साथ ही संजय निरुपम ने भी पार्टी को शिवसेना के साथ नहीं जाने की हिदायत दी है।

कट्टर हिंदुत्व की राजनीति
विरोध कर रहे नेताओं का तर्क है कि शिवसेना जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ और कट्टर हिंदुत्व की राजनीति करती रही है, उन्हें समर्थन करना कांग्रेस के लिये आत्मघाती हो सकता है,
इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी के केरल ईकाई के एक नेता ने शिवसेना द्वारा चलाये गये अभियान पुंगी बजाओ, लुंगी भगाओ की याद दिलाते हुए कहा कि शिवसेना के साथ कांग्रेस ना जाए।

बीजेपी को रोकना मकसद 
हालांकि इन विरोधों के बावजूद कांग्रेस हाईकमान ने शिवसेना के साथ सरकार बनाने का फैसला लिया है, कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को सत्ता से दूर रखना है,
कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से राय ली है, जिसमें कहा गया है कि बीजेपी को रोकने के लिये शिवसेना से भी कुछ शर्तों के आधार पर हाथ मिलाना हो, तो मिलाना चाहिये।

न्यूनतम साझा कार्यक्रम
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक तमाम विरोध के बावजूद भी बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिये कांग्रेस ने एनसीपी के साथ मिलकर शिवसेना को समर्थन देने का फैसला लिया है,
अब इंतजार है बस न्यूनतम साझा कार्यक्रम का, जिसके लिये कमेटी गठित किया गया है, कहा जा रहा है कि जल्द ही तीनों मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।