अजित पवार के आखिर कैसे हासिल किया एनसीपी विधायकों का समर्थन पत्र, शरद पवार के खास का हाथ?

अजित पवार की ओर से अब तक पूरे मामले में कोई बयान नहीं आया है, इस बीच ये रहस्य और गहराता जा रहा है कि उन्हें विधायकों का समर्थन पत्र कैसे हासिल हुआ।

महाराष्ट्र में चल रहे सियासी गहमागहमी के बीच दुविधा अब तक बनी हुई है, एनसीपी नेता अजित पवार को पार्टी के अन्य विधायकों का समर्थन पत्र कैसे हासिल हुआ, जिसे लेकर वो राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिले, इसके बाद तुरंत राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाकर देवेन्द्र फडण्वीस को सीएम और अजित पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिला दी गई, बीजेपी ने दावा किया है कि अजित पवार को 30 अक्टूबर को एनसीपी विधायक दल का नेता चुना गया था, उन्होने उसी हैसियत से बीजेपी की अगुवाई में सरकार बनाने का समर्थन पत्र सौंपा ।

राज गहरा रहा है 
अजित पवार की ओर से अब तक पूरे मामले में कोई बयान नहीं आया है, इस बीच ये रहस्य और गहराता जा रहा है कि उन्हें विधायकों का समर्थन पत्र कैसे हासिल हुआ,
एनसीपी चीफ शरद पवार से जब शनिवार को ये सवाल पूछा गया, तो उन्होने शपथग्रहण समारोह में गये विधायकों की ओर माइक बढा दिया, विधायकों द्वारा बताई गयी कहानी के बाद भी अजित पवार की ओर से दिये गये शपथ पत्र को लेकर रहस्य अब भी बरकरार है।

ये शख्स हैंडल करते हैं 
एनसीपी के एक धड़े का मानना है कि विधायक दल के नेता के तौर पर अजित पवार का चुनाव पत्र मुंबई स्थित पार्टी ऑफिस में पड़ा था,

एनसीपी में इस तरह के सभी पत्र और मामले शरद पवार के बेहद विश्वसनीय शिवाजीराव गरजे हैंडल करते हैं। शिवाजीराव पूर्व प्रशासनिक अधिकारी हैं, उन्हें शरद पवार ही पार्टी में लेकर आये थे, बाद में उन्हें एनसीपी का महासचिव नियुक्त कर दिया गया।

पद से हटाया गया 
बीजेपी को समर्थन देने के बाद शरद पवार ने तुरंत मामले पर सफाई दी और कहा कि ये अजित का निजी फैसला है, एनसीपी और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है,
फिर शाम को विधायकों के साथ बैठक में अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया, जयंत पाटिल को नया विधायक दल का नेता चुना गया, हालांकि अभी तक अजित पवार को पार्टी से नहीं निकाला गया है।